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Sirmour News: 20 गांवों के धंवाकरे पर निकले शिरगुल महाराज

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गिरिपार क्षेत्र में आशीर्वाद यात्रा पर निकले ​शिरगुल महाराज के साथ श्रद्धालु। स्रोत: ग्रामीण
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-दो सप्ताह तक चलेगी पारंपरिक आशीर्वाद यात्रा
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-पांच वर्ष बाद स्वयं भक्तों के बीच में पहुंचने की परंपरा

संवाद न्यूज एजेंसी

कफोटा (सिरमौर)। गिरिपार क्षेत्र में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कांडो दुगाना से क्षेत्र के आराध्य देव शिरगुल महाराज अपने पंद्रह दिवसीय पारंपरिक धंवाकरा (आशीर्वाद यात्रा) पर निकल पड़े हैं। यह यात्रा क्षेत्र के करीब 20 गांवों का भ्रमण करेगी, जहां देवता अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

यात्रा के शुभारंभ पर सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ देवता की शोभायात्रा निकाली गई। पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है।
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बताया जा रहा है कि आमतौर पर श्रद्धालु देवता के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं, लेकिन इस विशेष परंपरा में हर पांच साल बाद देवता स्वयं अपने भक्तों के बीच पहुंचते हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं तक पहुंचना है, जो मंदिर तक आने में असमर्थ रहते हैं।

हालांकि, यह धंवाकरा यात्रा वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे स्थगित करना पड़ा। ऐसे में इस बार यह यात्रा पूरे 10 साल बाद आयोजित हो रही है, जिससे श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

यात्रा कांडो से शुरू होकर कुफर लाणी, शमाह, पमता, टिकरोग, धनला, शावगा, शावड़ी, धाडमा, माटला, रांगुआ, आंद्रा, दाबिल, नेड़ा, इंदौली, पाटनी, भटाड़, मुईनल, बाग, खजूरी और कफोटा सहित विभिन्न गांवों से होते हुए अपने अंतिम पड़ाव दुगाना के परशुराम मंदिर में पहुंचेगी। यहां इसका विधिवत समापन किया जाएगा। इसके बाद शिरगुल महाराज पुनः कांडो मंदिर में विराजमान होंगे।
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शिरगुल मंदिर के भंडारी रतन सिंह कपूर ने बताया कि यह धंवाकरा परंपरागत रूप से हर पांच वर्ष में आयोजित होता है, लेकिन इस बार विशेष परिस्थितियों के चलते इसे दस वर्ष बाद आयोजित किया जा रहा है। संवाद
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