चूड़धार के लिए रवाना हुई शिरगुल महाराज की जातर
सिरमौर और सोलन के आराध्य देव की जातर 24 जून को वापस पहुंचेगी मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। जिला सिरमौर और शिमला के लोगों के आराध्य देव शिरगुल महाराज की जातर शनिवार को उनकी जन्मस्थली स्थित शाया मंदिर से चूड़धार को रवाना हुई। यह देवता स्नान यात्रा जिसे स्थानीय भाषा में जातर कहा जाता है 24 जून को वापस मंदिर पहुंचेगी।
देवता के मुख्य पुजारी पृथ्वीराज ठाकुर ने बताया कि प्राचीन परंपरा के अनुसार हर तीसरे वर्ष यह जातर शाया से देव स्नान के लिए चूड़धार जाती है।
इस जातर यानि देव यात्रा में देवता के पुजारी, देवे, घणिते, कार कारिंदे, शावगी और नौतबीन के लोग शामिल होते हैं। यह जातर पारंपरिक रूप से गाजे बाजे के साथ जाती है। प्रात: शिरगुल महाराज की पारंपरिक पूजा के बाद देवता के गुर अथवा घणिता के माध्यम से देव वाणी पूछ कर देव स्नान यात्रा की अनुमति मांगी गई। उसके बाद यह देव स्नान यात्रा प्रारंभ हुई।
यह देव यात्रा तीन दिनों में लौटेगी। यह देव यात्रा किसी भी मंदिर में रात्रि विश्राम नहीं करेगी और खुले आसमान के नीचे घने जंगलों में रात्रि विश्राम होगा। प्राचीन परंपरा के अनुसार शाया से निकलकर यह जातर बांगा पानी नामक स्थान पर खुले आसमान के नीचे विश्राम करेगी। वहां सभी यात्रियों का रात्रि भोजन भी खुले आसमान के नीचे ही होगा। रविवार को शिरगुल महाराज को चूड़धार पहुंचकर वहां देव स्नान होगा। उस रात उनका रात्रि विश्राम पिछले मोड़ पर होगा। सोमवार को शिरगुल महाराज अपने जन्मस्थान शाया वापस पहुंचेंगे और अपने मूल सिंहासन पर विराजमान होंगे। इस देव यात्रा में शिरगुल महाराज को पालकी में नहीं, बल्कि उनके मुख्य कारदार की पीठ पर बिठाकर ले जाया जाता है।
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