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Sirmour News: महाशिवरात्रि पर पातालेश्वर मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने नवाया शीश

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पांवटा क्षेत्र में शिवरात्रि पर्व पर शिव का प्रसाद ग्रहण करते लोग। संवाद
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- श्रद्धालुओं ने प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर में विधि विधान से भोले बाबा की विशेष पूजा-अर्चना की
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- भगवान महाकाल के दर्शन के लिए सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगीं
-पातालेश्वर मंदिर में पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और हरियाणा से भी श्रद्धालु यहां शीश नवाने पहुंचे
संवाद न्यूज़ एजेंसी

पांवटा साहिब ( सिरमौर)। ग्राम पातलियों के घने जंगल के किनारे पर स्थित प्राचीन श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर में हर वर्ष की भांति महाशिवरात्रि का पावन त्योहार परंपरागत हर्ष, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। पातालेश्वर मंदिर में पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और हरियाणा से भी हजारों श्रद्धालु शीश नवाने के लिए पहुंचे।
मंदिर समिति के अध्यक्ष दाता राम चौहान व महासचिव लक्ष्मी चंद अत्री ने बताया की देव भूमि हिमाचल को देवी-देवताओं की धरती कहा जाता है। आज भी यहां कई प्राचीन व धार्मिक स्थल है जो अपने आप में कई इतिहास समेटे हुए हैं। इसी शृंखला में पांवटा साहिब से करीब 5 किलोमीटर दूर महादेव चौक से कुछ दूरी पर ग्राम पातलियों के घने जंगल के किनारे पर स्थित प्राचीन श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर है। यह मंदिर शिवभक्तों की श्रद्धा, आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ये मंदिर अपने आप में एक विशेष धार्मिक इतिहास समाए हुए हैं। जैसे शिव की महिमा को लिख पाना बड़ा मुश्किल है, वैसे ही यह भी बता पाना कुछ मुश्किल सा प्रतीत होता है कि इस शिव धाम का इतिहास कितना पुराना है। पातालेश्वर मंदिर में हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और हरियाणा से भी श्रद्धालु यहां शीश नवाने के लिए पहुंचे हैं और भोलेनाथ के शिवलिंग के दर्शन किए और मनोकामनाएं मांगी।
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क्या कहना है मंदिर पुजारी का
मंदिर पुजारी संजय शर्मा ने कहा कि भगवान शिव ने यहां दर्शन करने वाले सब भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त करने प्राप्त है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के एक अति विशाल अलौकिक शिवलिंग पाताल के गर्व से प्रकट होने लगा। इसके कारण ही इस धाम का नाम श्री पातालेश्वर महादेव पड़ा। साथ में ही यह भी मान्यता भी रही है कि महर्षि पतंजलि की तपोभूमि होने के कारण इस गांव का नाम पातलियों पड़ा।
संवाद

पांवटा क्षेत्र में शिवरात्रि पर्व पर शिव का प्रसाद ग्रहण करते लोग। संवाद

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