संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में रेणुकाजी के गायत्री आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा व्यास डॉ. आचार्य विनीत डबराल वत्सल ने कहा कि स्वार्थ ही विश्व और त्याग ही अमृत है। कलियुग में भवसागर से पर जाने का सर्वोत्तम साधन श्रीमद्भागवत कथा श्रवण है। मानव जीवन में जब पुण्य कर्म उदय होते हैं तभी वह भागवत सुनने का अधिकारी बनता है। उन्होंने कहा कि पितरों को प्रसन्न करने का भी सर्वोत्तम उपाय यही है।
संगीतमयी कथा और भजनों से श्रोता भाव-विभोर हो रहे हैं। कथा का आयोजन 19 अगस्त तक चलेगा। इस मौके पर गायत्री आश्रम के संचालक महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती सहित संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे।