-समिति ने एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक के समक्ष उठाए पुनर्वास से जुड़े मुद्दे
-रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के सचिव योगेश ठाकुर ने पत्रकार वार्ता में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित गृहविहीन परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास को लेकर रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति हिमाचल प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के प्रबंध निदेशक से मुलाकात की। इस दौरान गृहविहीन परिवारों को किस्त के बजाय एकमुश्त मुआवजा देने और पुनर्वास नीति में बदलाव की मांग रखी। बुधवार को नाहन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने यह जानकारी साझा की।
समिति के प्रेस सचिव योगेश ठाकुर ने बताया कि एचपीपीसीएल की वर्तमान नीति के अनुसार गृहविहीन परिवारों को मुआवजा किस्त में देने का प्रावधान है, लेकिन प्रभावित परिवारों को नया घर बनाने और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक साथ धनराशि की आवश्यकता होती है। ऐसे में मुआवजा एकमुश्त जारी किया जाना चाहिए, ताकि विस्थापित परिवार बिना आर्थिक बाधा के अपना आशियाना बना सकें।
उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने पुनर्वास के लिए तीन बिस्वा भूमि की अनिवार्य शर्त को हटाने की मांग भी प्रबंध निदेशक के समक्ष रखी। समिति का कहना है कि यह शर्त कई प्रभावित परिवारों के लिए व्यावहारिक नहीं है। समिति ने सुझाव दिया कि जिन विस्थापितों के मकान दो मंजिला हैं, उन्हें तीन बिस्वा भूमि के समकक्ष माना जाए, जिससे अधिक पात्र परिवार पुनर्वास योजना का लाभ ले सकें।
योगेश ठाकुर ने बताया कि एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि गृहविहीन परिवारों को 75 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त देने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही पुनर्वास से संबंधित अन्य मांगों पर भी गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया गया है।