रेणुका बांध निर्माण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया है। माना जा रहा है कि कभी भी ग्रीन ट्रिब्यूनल बांध को लेकर अपना फैसला सुना सकता है। रेणुका बांध बनने के लिए करीब एक लाख हरे पेड़ों की बलि देनी पड़ेगी। रेणुका बांध प्रबंधन की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता जीएस अत्री ने बांध के पक्ष में अपनी दलीलें एनजीटी के समक्ष रखीं। अधिवक्ता ने इस दौरान बांध निर्माण की बारीकियों के साथ इसके महत्व को भी बताया। बाद में सभी दलीलें सुनने के बाद एनजीटी ने अपना फैसला अनिश्चितकाल के लिए सुरक्षित रख लिया। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी रेणुका बांध मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी तक टाल दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक माह पूर्व रेणुका बांध के संदर्भ में फैसला सुनाते हुए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को इस बाबत जल्द अपना पक्ष रखने को कहा था। लेकिन, एक माह गुजर जाने के बाद भी मंत्रालय न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष नहीं रख सका है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से 6 जनवरी तक अपना पक्ष रखने को कहा है।
एनजीटी की तरफ से रेणुका बांध निर्माण को लेकर फैसला सुरक्षित रखने पर अब शीघ्र ही कोई सकारात्मक फैसला आने की उम्मीद बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की गई है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को रेणुका बांध मसले पर खर्च होने वाली राशि का लेखा जोखा अपने जवाब में स्पष्ट करना होगा।
बीके कौशल, महाप्रबंधक, रेणुका बांध परियोजना