एनडीए सरकार की रेलवे लाइन सुविधा देने की कोई नियत ही नहीं : अनिंद्र सिंह नोटी
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को बढ़ावा देने के लिए रेलवे लाइन बेहद जरूरी
छह दशकों से सिरमौर को रेलवे लाइन का मुद्दा सर्वेक्षण करवाने तक ही सिमटा
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। छह दशकों से जिला सिरमौर को रेलवे लाइन से जोड़ने का इंतजार समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है। वर्ष 1962 में रेल लाइन सुविधा देने को सर्वेक्षण किया जाता रहा है। अब, 62 किलोमीटर लंबी दूरी वाले जगाधरी से पांवटा लाइन को फिर सर्वेक्षण तो हुआ। केंद्रीय रेल मंत्री के संसद में मिले जवाब ने हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा इकाई, उद्यमियों, रेलवे लाइन संघर्ष समिति और क्षेत्रवासियों का दिल तोड़ दिया है। क्षेत्रवासियों ने रेलवे जंक्शन सहारनपुर से पांवटा को रेलवे लाइन से जोड़ने की पुरजोर मांग उठाई है।
हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा इकाई के प्रधान सतीश गोयल और महासचिव नवीन अग्रवाल ने बताया कि पांवटा साहिब तथा कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में हजारों छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। रेलवे सुविधा से कच्चा और तैयार माल देश के कोने-कोने में आसानी से पहुंचाया जा सकता है। किसी क्षेत्र के विकास, खासकर एसएमएमई के तहत आने वाले उद्योगों, रोजगार व विकास को बढ़ावा देने को रेलवे लाइन आज वक्त की मांग बन चुकी है। ऐसे में जगाधारी-पांवटा लाइन को मंजूरी नहीं मिलना हतोत्साहित करने वाला साबित हो रहा है।
रेलवे लाइन संघर्ष समिति अध्यक्ष अनिंद्र सिंह नोटी व हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मदन लाल खुराना ने बताया कि केंद्र की एनडीए सरकार की नीयत ही नहीं है। भारत कल्याणकारी गणराज्य है। इसमें रेलवे, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा व परिवहन सुविधाओं की सेवाएं केवल लाभ कमाने को नहीं दी जाती है। ऐसे में केंद्रीय रेल लाइन मंत्री अश्वनी वैष्णव का राज्यसभा में सांसद इंदुबाला गोस्वामी को सदन में जवाब सिरमौर के लोगों को काफी दिल दुखाने वाला रहा है। इसमें रेल मंत्री ने कहा कि नई रेल परियोजनाएं यातायात की संभावनाओं, मार्ग की लाभप्रदता को ध्यान में रखते हुए स्वीकृति प्रदान की जाती है। केंद्र सरकार और रेलवे मंत्री से सहारनपुर रेलवे जंक्शन से पांवटा साहिब को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग रखी है।
हिमोत्कर्ष सिरमौर इकाई के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद तिवारी व कुलवंत सिंह चौधरी ने कहा कि सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र पांवटा साहिब और कालाअंब को रेलवे लाइन सुविधा मिलने की उम्मीद रही है। 1962 में प्रथम बार तथा 2025 में अंतिम बार जगाधरी से पांवटा साहिब-राजबन रेल लाइन सर्वेक्षण से निराशा ही हासिल होती रही है। कम राजनीतिक इच्छाशक्ति व खास दबाव नहीं बना पाने से जनता इस सुविधा से वंचित है। पांवटा साहिब और कालाअंब जैसे क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते फार्मा हब हैं, रेल सेवा की अनुपलब्धता औद्योगिक विकास में बड़ी बाधा बनती जा रही है।
अरविंद गोयल, मदन शर्मा व सुरजीत वर्मा का कहना है कि राजबन सीसीआई इकाई, प्रतिष्ठान आईआईएम सिरमौर धौलाकुआं स्थान में देश विदेश से छात्र विभिन्न कोर्स करते हैं। जिला मुख्यालय नाहन में मेडिकल कॉलेज भी निर्माणाधीन है। राजगढ़ में इटरनल विश्वविद्यालय बड़ू साहिब, इंजीनियरिंग कॉलेज, पांवटा में डेंटल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज व सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रहीं हैं। रेलवे सुविधा से ही औद्योगिकीकरण और क्षेत्र में पर्यटन विकास के नए पंख लग सकेंगे। रेलवे को मंजूरी नहीं मिलना निराशजनक साबित हो रहा है, लेकिन अब रेलवे मंत्री अश्वनी वैष्णव के संसद में दिए जवाब से उम्मीदों को जोर का झटका लगा है। सर्वे एक तरह से चुनावी लॉलीपॉप साबित होता रहा है।
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मजबूती से उठाते रहे रेलवे का मुद्दा : सुरेश कश्यप
-शिमला संंसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि जगाधरी से पांवटा साहिब और कालाअंब क्षेत्र को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की मांग संसद में उठाते रहे। अब क्षेत्र के उद्यमियों व लोगों की मांग पर सहारनपुर रेलवे जंक्शन से पांवटा साहिब को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग को भी मजबूती से उठाया जाएगा।
संवाद