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Sirmour News: मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों को उपचार करवाना हुआ मुश्किल

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दोनों ओर से बंद मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन ओपीडी में उपचार के इंतजार में मरीज। संवाद
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गाउंड रिपोर्ट
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-अस्पताल में बढ़ती भीड़, जगह की कमी और वेंटिलेशन की बदहाल व्यवस्था पड़ रही भारी

-गायनी, मेडिसन, नेत्र, ऑर्थो ओपीडी में क्रॉस वेंटिलेशन न होने से घुटता है दम

-गर्मी का मौसम शुरू होने से बढ़ गई समस्या, बुजुर्ग और सांस के रोगी प्रभावित

संवाद यूज एजेंसी

नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इन दिनों इलाज करवाना मरीजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ओपीडी में बढ़ती भीड़, जगह की कमी और वेंटिलेशन की बदहाल व्यवस्था उपचार करवाने पहुंचे लोगों को और पीड़ा दे रही है। गायनी, मेडिसन, नेत्र और ऑर्थो ओपीडी में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

गर्मी के मौसम ने समस्याओं को और बढ़ा दिया है। ओपीडी कक्षों में हवा के आने के लिए केवल एक खिड़की और एक वेंटिलेटर है, जो बढ़ती भीड़ के सामने नाकाफी साबित हो रहा है। दोनों ओर चिकित्सकों के कक्ष होने के कारण क्रॉस वेंटिलेशन नहीं हो पाता, जिससे अंदर का वातावरण घुटन भरा हो जाता है। मेडिसन, ऑर्थो और ईएनटी ओपीडी दोनों ओर से बंद जगह में चल रही है। यहां हवा के लिए केवल एक खिड़की और वेंटिलेशन है। यही हाल गायनी, नेत्र जांच और दंत ओपीडी का भी है।
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अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम में हो रहे परिवर्तन से वायरल फीवर, संक्रमण और गैर संचारी रोगों के मामलों में तेजी आई है। सबसे ज्यादा दबाव मेडिसिन ओपीडी पर रहता है। यहां सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लग जाती हैं। जगह की कमी, भीड़ और खराब वेंटिलेशन का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और सांस के रोगियों पर पड़ रहा है। कई मरीजों को इंतजार के दौरान घुटन और बेचैनी की शिकायत होती है। वहीं गर्भवती महिलाओं को ओपीडी से वार्ड तक जाने के लिए भीड़ के बीच से गुजरना पड़ रहा है।

अस्पताल में सिरमौर के अलावा सीमावर्ती नारायणगढ़ और सोलन से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। सीमित संसाधनों के बीच बढ़ती मरीजों की संख्या और पुराना ढांचे के चलते यहां पर सेवाएं दे रहे स्टाफ और मरीजों को परेशानियों सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज का नया भवन लंबे समय से बंद पड़ा है। वर्तमान में पूरा संस्थान पुराने अस्पताल भवन में चल रहा है, जो मौजूदा जरूरतों के हिसाब से छोटा साबित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि हजारों मरीजों का भरोसा जिस मेडिकल कॉलेज पर टिका है, वहीं बुनियादी सुविधाएं, जगह, हवा और सुचारु व्यवस्था की कमी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
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मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लो ने बताया कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने माना कि भवन की कमी के चलते कई बार मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर दिक्कतें आती हैं। नए भवन का निर्माण सरकार और संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में है। संवाद

दोनों ओर से बंद मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन ओपीडी में उपचार के इंतजार में मरीज। संवाद

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