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रियायती पास छूट बंद करने पर किराया बढ़ाने की भी जरूरत नहीं : बलविंद्र सिंह

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रियायती पास छूट बंद करने पर किराया बढ़ाने की भी जरूरत नहीं : बलविंद्र सिंह
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कहा, सरकार की छूट का अधिकतर नौैकरी पेशा महिलाएं ही लाभ उठा रहीं
सिरमौर निजी बस ऑपरेटर संघ सिरमौर इकाई ने प्रदेश सरकार को दिया सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब)सिरमौर)। सिरमौर निजी बस ऑपरेटर यूनियन में प्रदेश सरकार को सुझाव देकर एक मांग उठाई है जिसमें रियायती पास एवं अन्य छूट की योजनाओं को बंद करने का आग्रह किया है। इससे सरकार को सामान्य किराया बढ़ाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। सिरमौर बस ऑपरेटर यूनियन अध्यक्ष बलविंद्र सिंह व महासचिव अखिल शर्मा ने ये बात कही है।
अध्यक्ष बलबिंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का न्यूनतम किराया 5 रुपये से 10 तक बढ़ाने के फैसले का स्वागत करते हैं। हालांकि आम जनता पर ही इसका भारी बोझ पड़ेगा। यूनियन ने मांग रखी है कि प्रदेश में एचआरटीसी की बसों में किराये में महिलाओं को 50 फीसदी की छूट बंद की जाए। इस छूट का लाभ वास्तव में अधिकतर वो महिलाएं ले रहीं हैं जो सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवाएं देकर आर्थिक रूप से संबल हैं। जबकि आम महिलाओं को कभी कभार ही सफर करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की ओर से सरकार से बस किराये में बढ़ोतरी के लिए जो प्रस्ताव दिया गया है उससे प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर तो खुश हैं क्योंकि निजी बस संचालक लगातार यहां पर बस किराये में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। अब सरकार यदि किराया बढ़ाती है तो इसका लाभ निजी बस मालिकों को भी होगा। हालांकि आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसलिए ऑपरेटरों ने सरकार से न केवल बस किराये में बढ़ोतरी की मांग की है बल्कि उन्होंने महिलाओं से भी पूरा किराया लेने की मांग उठाई है।
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सिरमौर निजी बस ऑपरेटर संघ के महासचिव अखिल शर्मा ने कहा कि हिमाचल में न्यूनतम किराया देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे कम है। हिमाचल निजी बस ऑपरेटर संघ भी बहुत पहले से न्यूनतम किराया बढ़ाने की मांग कर रहा है। महासचिव ने कहा कि यदि रियायती पास एवं अन्य छूट की योजनाओं को बंद किया जाये तो सामान्य किराया बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एचआरटीसी की बसों में किराये में 50 फीसदी की छूट दी जा रही है। इस छूट का लाभ वास्तव में वो महिलाएं ले रही हैं जो सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवाएं दे रही है। जिनकों ठीक ठाक वेतन मिलता हंै। गरीबी रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को इसका लाभ कम ही मिलता है।
संवाद

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