नाहन। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत की सुनाई दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने माना कि बैंक ने कानूनी समय-सीमा पूरी होने से पहले ही शिकायत दायर कर दी थी, इसलिए मामला विधिसम्मत नहीं था।
मामला वर्ष 2022 का है। एचपी स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक ने पझौता निवासी प्रेम सिंह के खिलाफ 26,943 रुपये के चेक के अनादरण का मामला दर्ज कराया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट, राजगढ़ ने आरोपी को छह माह के कारावास और 30 हजार रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी।
अपील पर सुनवाई करते हुए सत्र न्यायाधीश योगेश जसवाल ने पाया कि बैंक ने 21 फरवरी 2022 को कानूनी नोटिस भेजा था। कानून के अनुसार नोटिस की सेवा के बाद आरोपी को भुगतान के लिए 15 दिन का अनिवार्य समय दिया जाना आवश्यक था। अदालत ने पाया कि बैंक ने यह अवधि पूरी होने से पहले ही अदालत में शिकायत दायर कर दी थी। इसलिए शिकायत समयपूर्व मानी गई। इसी आधार पर सत्र न्यायालय ने आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत की दोषसिद्धि और सजा को निरस्त कर दिया।