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पटाखें जले तो पांवटा-कालाअंब की आबोहवा में घुल जाएगा जहर

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नाहन/ पांवटा साहिब (सिरमौर)। दीपों का पर्व दीपावली दीयें जलाकर ही मनाया जाए तो बेहतर होगा। वातावरण में जहर घोलने वाले पटाखे जलाना न केवल रोगियों के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो सकता है। फेफड़ों पर सीधा हमला कर रहे कोरोना वायरस के बीच इस बार हरित दीपावली ही मनाई जाए तो यह मानवता की सेवा होगी। सिरमौर जिले में पांवटा साहिब और कालाअंब दीपावली पर प्रदूषण बढ़ने के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील माने गए हैं।
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पांवटा साहिब में पिछले वर्ष दीपावली की रात प्रदूषण का स्तर 156 आरएसपी (रेस्परेविल सस्पेंडेंट पार्टीकुलेट) प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था। जबकि कालाअंब के तहत त्रिलोकपुर में यह मात्रा 96 आरएसपीएम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई थी। इसी वर्ष छह नवंबर को कालाअंब में प्रदूषण की मात्रा 170 आरएसपीएम दर्ज हुई है। दीपावली पर अधिकतर उद्योग बंद रहते हैं लेकिन उद्योगों से होने वाले प्रदूषण के स्थान पर पटाखों का प्रदूषण वातावरण को जहरीला बना देगा।
जानकारों की मानें तो पटाखों के जलाने से सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड जैसे जहरीले रसायन वातावरण में जहर घोल देते हैं। वातावरण में इन गैसों के फैलने से ऑक्सीजन कम हो जाती है। एक छोटा सा पटाखा करीब दस लीटर और बड़ा पटाखा करीब सौ लीटर ऑक्सीजन कम कर सकता है जो हृदय रोगियों, ब्लड प्रेशर और सांस के रोगियों की दिक्कतें बढ़ा सकता है।
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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पांवटा स्थित क्षेत्रीय प्रयोगशाला के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हितेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि दीपावली पर सरकार और एनजीटी के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। केवल निर्धारित 2 घंटे ही ग्रीन पटाखे चलाएं। सीएमओ डॉ. केेके पराशर ने अनुसार पटाखों से फैलने वाले प्रदूषण से लोगों को सांस संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। कोरोना वायरस के इस दौर में पटाखों का प्रयोग घातक है। लिहाजा, लोगों को पटाखों के प्रयोग से बचना चाहिए।
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