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Himachal News : किसानों के लिए राहत, धान-मक्का समेत टमाटर और आलू की फसलों का होगा बीमा; 15 अगस्त तक आवेदन

Thu, 06 Aug 2026 02:25 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, धौलाकुंआ।

सार

हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन के लिए फसल बीमा योजना का पोर्टल शुरू हो गया है। किसान 15 अगस्त तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत धान, मक्का, टमाटर और आलू की फसल का बीमा करवा सकेंगे। धान और मक्का के लिए किसानों को 98 रुपये प्रति बीघा प्रीमियम देना होगा। प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने पर बीमा के तहत आर्थिक सहायता मिलेगी।
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क्या है पीएम फसल बीमा योजना। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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खरीफ सीजन में किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में फसल बीमा योजना का पोर्टल शुरू हो गया है। अब किसान 15 अगस्त तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा करवा सकेंगे। अमर उजाला ने 27 जुलाई के अंक में ‘फसल सुरक्षा कवच पर संकट, नहीं खुल रहा बीमा पोर्टल’ शीर्षक से किसानों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद विभाग ने पोर्टल शुरू कर दिया है।

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खरीफ सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत धान और मक्का की फसलों को शामिल किया गया है। वहीं, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत टमाटर और आलू की फसलों का बीमा किया जाएगा। धान और मक्का की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 60 हजार रुपये की बीमित राशि तय की गई है। इसके लिए किसानों को केवल दो प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। यह राशि प्रति हेक्टेयर 1200 रुपये और प्रति बीघा करीब 98 रुपये बनती है।

वहीं, टमाटर की फसल के लिए दो लाख रुपये और आलू के लिए डेढ़ लाख रुपये की बीमित राशि निर्धारित की गई है। टमाटर के लिए किसान को 800 रुपये प्रति बीघा और आलू के लिए 600 रुपये प्रति बीघा प्रीमियम जमा करना होगा। बाकी प्रीमियम केंद्र और प्रदेश सरकार वहन करेगी।

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प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान पर मिलेगा लाभ
योजना के तहत किसान बुआई से लेकर कटाई तक सूखा, बाढ़, सैलाब, प्राकृतिक आग, भूमि कटाव समेत अन्य प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का दावा कर सकेंगे। फसल कटाई के बाद दो सप्ताह के भीतर होने वाले नुकसान और स्थानीयकृत आपदाओं से प्रभावित फसलों के लिए भी मुआवजे का प्रावधान है।

उपनिदेशक कृषि सिरमौर साहब सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि 15 अगस्त से पहले अपनी फसलों का बीमा जरूर करवाएं। उन्होंने बताया कि ऋणी किसानों की फसलों का बीमा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार स्वत: किया जाएगा। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं करवाना चाहता है तो उसे संबंधित बैंक में घोषणा पत्र देना होगा। गैर-ऋणी किसान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, बैंक या लोक मित्र केंद्र के माध्यम से फसल बीमा करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर बीमा करवाकर किसान प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख कृषि बीमा योजना है, जिसकी शुरुआत 13 जनवरी 2016 को किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी।

योजना का उद्देश्य
  • प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सहायता देना।
  • खेती में किसानों के जोखिम को कम करना।
  • किसानों की आय को सुरक्षित रखना।
  • कृषि क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देना।
किन फसलों का बीमा होता है?
राज्य और मौसम के अनुसार अधिसूचित फसलें शामिल होती हैं। हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान आमतौर पर:
  • धान
  • मक्का
  • (कुछ योजनाओं के तहत) टमाटर
  • आलू

कितना प्रीमियम देना पड़ता है?
किसानों को कुल प्रीमियम का केवल एक छोटा हिस्सा देना होता है।
  • खरीफ फसलें: बीमित राशि का 2%
  • रबी फसलें: 1.5%
  • व्यावसायिक/बागवानी फसलें: 5%
बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं।

किन परिस्थितियों में मिलता है मुआवजा?
योजना के तहत इन स्थितियों में दावा किया जा सकता है:
  • सूखा
  • बाढ़ और सैलाब
  • ओलावृष्टि
  • चक्रवात और तेज आंधी
  • भूस्खलन
  • जलभराव
  • प्राकृतिक आग
  • बिजली गिरना
फसल कटाई के बाद निर्धारित अवधि (आमतौर पर 14 दिन) के भीतर प्राकृतिक कारणों से नुकसान
स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति

आवेदन कैसे करें?
  • किसान आवेदन कर सकते हैं:
  • राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल
  • बैंक
  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)/लोक मित्र केंद्र
  • सहकारी बैंक या संबंधित वित्तीय संस्थान
कौन करा सकता है बीमा?
  • ऋणी किसान (निर्धारित प्रावधानों के अनुसार)
गैर-ऋणी किसान (स्वेच्छा से)

योजना का लाभ
  • प्राकृतिक आपदा से आर्थिक सुरक्षा
  • खेती में जोखिम कम
  • नुकसान होने पर मुआवजा
  • किसानों की आय और खेती की निरंतरता बनाए रखने में मदद
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