नाहन। अतिरिक्त जिला न्यायालय ने जमीन विवाद मामले में फैसला सुनाते हुए समझौता डिक्री को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता पक्ष धोखाधड़ी के आरोप साबित करने में असफल रहा है। इस फैसले के बाद 2014 की समझौता डिक्री बरकरार रहेगी और उसी के आधार पर जमीन का बंटवारा मान्य रहेगा।
यह विवाद तहसील पांवटा साहिब (रामपुर बनजारा) में 22 बीघा 5 बिस्वा जमीन को लेकर चल रहा था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि वर्ष 2014 में पारित समझौता डिक्री उनके बिना सहमति और हस्ताक्षर के धोखे से कराई गई। इससे उन्हें उनके हिस्से से वंचित कर दिया गया। उनका कहना था कि उन्होंने न तो अपने अधिकार छोड़े और न ही किसी को ऐसा करने का अधिकार दिया। इसके बावजूद अन्य पक्षों ने मिलीभगत कर कोर्ट से समझौता डिक्री हासिल कर ली। वहीं, प्रतिवादियों ने दलील दी कि समझौता पूरी जानकारी और परिवार की सहमति से हुआ था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुनने के बाद याचिका को गैर-मान्य (नॉन-मेंटेनेबल) मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत में संबंधित जमीन पर उनका कोई ठोस अधिकार सिद्ध नहीं हुआ।