नाहन। परिवार न्यायालय ने भरण-पोषण आदेश के क्रियान्वयन से जुड़े मामले में महिला को राहत देते हुए डिफॉल्ट में खारिज हो चुकी याचिका बहाल कर दी है। न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी, बल्कि सुनवाई की तारीख गलत नोट होने के कारण वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सकी।
यह मामला बीना देवी बनाम हेत राम का है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आवेदन देकर बताया कि धारा 128 सीआरपीसी के तहत दायर उसकी याचिका 10 मार्च 2026 को अनुपस्थिति के कारण डिफॉल्ट में खारिज हो गई थी। उसने भूलवश अगली तारीख 10 अप्रैल 2026 नोट कर ली थी, जबकि सुनवाई 10 मार्च 2026 को थी। इसी कारण वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सकी।
न्यायालय ने कहा कि प्रक्रिया संबंधी नियम न्याय देने के साधन हैं, न कि न्याय में बाधा उत्पन्न करने के लिए। इसी आधार पर अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए एक्जीक्यूशन याचिका बहाल कर दी। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।