-घी, दूध और अनाज चढ़ाकर पशुओं की रक्षा की मांगी दुआ
-दूसरे आषाढ़ रविवार पर हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले की कौलांवाला भूड़ पंचायत के त्रिभोवनी (त्रिभोणी) स्थित पशुओं की देवी के प्रसिद्ध मंदिर में रविवार को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। आषाढ़ मास के दूसरे रविवार पर आयोजित मेले में सिरमौर के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा हरियाणा के मोरनी क्षेत्र से भी हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में घी, दूध, मक्खन और अनाज अर्पित कर अपने दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और समृद्धि की कामना की।
रविवार तड़के पांच बजे से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह सात बजे के बाद दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। दिनभर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहा। श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लिया और अपने पशुओं को बीमारियों, जंगली जानवरों तथा जहरीले कीट-पतंगों से सुरक्षित रखने की प्रार्थना की।
त्रिभोवनी मंदिर क्षेत्र में पशुओं की देवी के रूप में विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि माता की कृपा से दुधारू पशु स्वस्थ रहते हैं और पशुधन की रक्षा होती है। यही कारण है कि हर वर्ष आषाढ़ और मार्गशीर्ष मास के प्रत्येक रविवार को यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें हिमाचल और हरियाणा से बड़ी संख्या में पशुपालक परिवार पहुंचते हैं।
श्रद्धालु अनिल ठाकुर और निर्मल चौहान ने बताया कि जब दुधारू पशु बछड़े को जन्म देता है तो पहले सप्ताह के दूध से तैयार घी और मक्खन माता को भेंट स्वरूप अर्पित किया जाता है। यह वर्षों से चली आ रही परंपरा है। श्रद्धालु पूरे वर्ष अपने पशुओं की सलामती और अच्छी दुग्ध उत्पादन की कामना लेकर यहां आते हैं।
श्रद्धालु तपेंद्र ठाकुर और रतन सिंह ने बताया कि नाहन, पच्छाद, श्रीरेणुकाजी के धारटीधार क्षेत्र, पांवटा साहिब उपमंडल सहित हरियाणा के मोरनी क्षेत्र के पशुपालकों की इस मंदिर में गहरी आस्था है। लोग अपने दुधारू पशुओं का घी, मक्खन और अनाज माता को अर्पित करते हैं। पूजा के बाद मंदिर के पुजारी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद स्वरूप रक्षा के चावल प्रदान करते हैं, जिन्हें लोग अपने घर और पशुशालाओं में सुरक्षित रखते हैं।
त्रिभोवनी मंदिर नाहन से करीब 35 किलोमीटर, सराहां से 25 किलोमीटर, कौलांवाला भूड़ से तीन किलोमीटर तथा हरियाणा के मोरनी से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की लोक परंपराओं और पशुपालन संस्कृति का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मंदिर के पुजारी लकी शर्मा ने बताया कि 28 जून को आषाढ़ मास के दूसरे रविवार के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर कमेटी और श्रद्धालुओं की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने बताया कि आषाढ़ मास के शेष रविवारों में भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में आने की संभावना है।
पशुओं की देवी त्रिभोवनी मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। स्रोत : श्रद्धालु