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हिमाचल सरकार की डफली अलग और पूरे हिंदुस्तान की डफली अलग : चौहान

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नाहन में प्रदेश सरकार के खिलाफ रोष रैली में भाग लेते पेंशनर। संवाद
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लंबित वित्तीय देनदारियां, महंगाई भत्ते, एरियर, मेडिकल बिलों का भुगतान न होने से रोष

हिमाचल सरकार ने हक न देकर पेंशनरों की उम्मीदों को मिट्टी में मिला कर रख दिया

संवाद न्यूज एजेंसी

नाहन (सिरमौर)। ढलती उम्र में घर में आराम करने की बजाए सिरमौर के पेंशनर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। लंबित वित्तीय देनदारियों, एरियर, डीए (महंगाई भत्ता) और मेडिकल बिलों के भुगतान न होने से नाराज सभी विभागों, बोर्डों और निगमों के पेंशनरों ने जिला मुख्यालय नाहन में प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए पेंशनरों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

जिला सिरमौर पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले शुक्रवार को मुख्यालय नाहन में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों के पेंशनर सुबह 10 बजे हिंदू आश्रम में एकत्रित हुए। यहां से बुजुर्ग पेंशनरों ने डीसी कार्यालय तक लंबित मांगों के पूरा नहीं होने पर रोष रैली निकाली।
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पेंशनरों ने उनकी अनदेखी पर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। डीसी कार्यालय के परिसर में भी पेंशनरों ने धरना प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह सिर्फ आगाज हुआ है, सरकार ने यदि उनकी देनदारियां नहीं दी तो जिला समेत पूरे प्रदेश में एक आंदोलन खड़ा होगा।

इसके बाद पेंशनरों ने कमेटी के संयोजक ओएल चौहान की अगुवाई में मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त प्रियंका वर्मा को मांग पत्र भी दिया। इससे पूर्व मीडिया को संबोधित करते हुए जिला सिरमौर पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के संयोजक ओएल चौहान ने कहा कि वर्ष 2016 से एरियर का भुगतान अटका हुआ है, 16 प्रतिशत डीए अभी तक जारी नहीं किया गया है और करोड़ों रुपये के मेडिकल बिल अब तक क्लियर नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार की डफली अलग और पूरे हिंदुस्तान की डफली अलग ही बज रही है। उन्होंने कहा कि देश के दूसरे राज्यों में पेंशनरों को 58 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है। जबकि हिमाचल सरकार केवल 42 प्रतिशत डीए दे रही थी। दो दिन पहले सरकार ने भद्दा मजाक करते हुए सरकार ने 3 प्रतिशत डीए देने की अधिसूचना जारी की, वो भी उस तिथि से जिस तिथि से कोई डीए लंबित ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पता नहीं मुख्यमंत्री के कौन से सलाहकार हैं, जिनकी बात या तो मुख्यमंत्री नहीं मानते या फिर वह मुख्यमंत्री को गलत गाइड कर रहे हैं।

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आर्थिक तंगी मेें गुजर रहा जीवन

कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आर्थिक सुरक्षा ही बुजुर्गों का सहारा होती है, लेकिन एरियर और डीए भुगतान में देरी के कारण कई वरिष्ठ नागरिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्हें इलाज और दवाइयों के लिए भी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। सरकारों ने चार साल से लाखों रुपये के मेडिकल बिलों का भुगतान तक नहीं किया है। कई बीमार पेंशनर तो अपने पैसे मिले बिना दुनिया ही छोड़कर चले गए हैं।
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अब और इंतजार नहीं, आंदोलन तेज होगा

संयोजक ओएल चौहान ने कहा कि पेंशनरों का 2016 से एरियर लंबित है। मेडिकल बिलों का भुगतान रुका हुआ है। महंगाई भत्ता 16 फीसदी देय है, लेकिन जारी नहीं किया गया। सरकार हमारी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। अब सब्र का बांध टूट चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही संयुक्त समन्वय समिति का गठन कर समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में रैलियां और विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे।

प्रदर्शन के दौरान तीन से चार सौ पेंशनर मौजूद रहे। इनमें महिला पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों ने भी ढलती उम्र और बीमारी के बावजूद प्रदर्शन किया।

संवाद

नाहन में प्रदेश सरकार के खिलाफ रोष रैली में भाग लेते पेंशनर। संवाद

नाहन में प्रदेश सरकार के खिलाफ रोष रैली में भाग लेते पेंशनर। संवाद

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