नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले की छह पंचायत समितियों पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की नजर है। जिला परिषद के साथ-साथ बीडीसी पर कब्जा जमाने के लिए दोनों ही राजनीतिक दलों के नेता स्वयं प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं।
जिले में किस दल का दबदबा रहेगा, इसको लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष सिरमौर जिले से होने के कारण यहां भाजपा के प्रदर्शन पर सबकी नजरें हैं। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनावों को लें तो जिले तो पंचायत समितियों का चुनाव परिणाम फिफ्टी-फिफ्टी रहा था। तीन विकास खंडों में कांग्रेस जबकि तीन में भाजपा ने कब्जा जमाया था।
जिला परिषद की 17 और छह विकास खंडों की छह समितियों के 118 वार्डों में अपनी-अपनी पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों की जीत के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। जिले के दिग्गज नेता खुद चुनाव प्रचार में कूदे हुए हैं। शिलाई में विधायक हर्ष वर्धन चौहान और बलदेव तोमर, पांवटा में ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी और किरनेश जंग, नाहन में डॉ. राजीव बिंदल, अजय बहादुर और अजय सोलंकी समेत पच्छाद और राजगढ़ में विधायक रीना कश्यप और जीआर मुसाफिर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इतना ही नहीं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप का जिला होने के नाते यहां राज्य स्तर पर भी भाजपा के प्रदर्शन पर नजर है। दोनों ही दल जिप और बीडीसी पर कब्जा जमाने के लिए मैदान में उतरे हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में सिरमौर की जिला परिषद पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था जबकि छह पंचायत समितियों में से तीन पर भाजपा और तीन पर कांग्रेस काबिज हुई।
बॉक्स के लिए--
पांवटा साहिब है जिले की सबसे बड़ी पंचायत समिति
सिरमौर में बीडीसी की छह पंचायत समितियों में नाहन में 16, पच्छाद में 15, राजगढ़ में 15, शिलाई में 15 और संगड़ाह में 17 वार्ड है। पांवटा साहिब जिला की सबसे बड़ी पंचायत समिति है। यहां 40 वार्डों से चुनकर आए पंचायत समिति सदस्य अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करेंगे। किस दल के जितने अधिक वार्ड सदस्य चुनकर आते हैं, यह 22 जनवरी को होने वाली मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
----
21 बीडीसी सदस्य चुने गए हैं निर्विरोध
जिले की छह पंचायत समितियों में 21 बीडीसी सदस्य निर्विरोध चुने गए हैं। विभिन्न ब्लॉकों में चुन गए इन सदस्यों पर राजनीतिक दलों ने अभी से डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, कुछ उम्मीदवार पहले ही पार्टी समर्थित बताए जा रहे हैं लेकिन कुछ सदस्य गैर राजनीतिक रूप से चुने गए हैं जिन पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की नजर है।