न बिजली न पानी, प्लास्टर उखड़ा और खिड़कियों की हालत खस्ता
सड़क न होने से परिजनों को उठाकर ले जाने पड़ रहे मृतकों के शव
योगेंद्र कपिला
संगड़ाह (सिरमौर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) संगड़ाह का शव विच्छेदन गृह भवन की हालत दयनीय है। शव विच्छेदन (पोस्टमार्टम) प्रक्रिया के दौरान चिकित्सकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं परिजनों को मृतक का शव भी उठाकर विच्छेदन गृह तक लाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सेवाएं देने के दावों की पोल यहां खुलती नजर आ रही है।
स्वास्थ्य खंड संगड़ाह के अंतर्गत सीएचसी के इस शव विच्छेदन गृह का भवन लंबे अरसे से खस्ताहाल में है। भवन में न तो बिजली की व्यवस्था है, न ही पानी है। भवन का पलास्टर उखड़ गया है। वहीं भवन के चारों ओर झाड़ियां उगी हुईं हैं। चिकित्सकों को शव का पोस्टमार्टम करवाने में परेशानियां झेलनी पड़ रही है। वहीं पानी की व्यवस्था परिजनों को स्वयं करनी पड़ रही है।
शव विच्छेदन गृह भवन के लिए सड़क सुविधा भी नहीं है। मृतक के शव को परिजन स्वयं उठाकर विच्छेदन गृह तक पहुंचा रहे हैं। दुर्घटना के उपरांत मृतक के परिजनों पर मुसीबतों का पहाड़ पहले ही टूटा होता है। पोस्टमार्टम के दौरान उन्हें पहले तो शव को यहां लाना पड़ रहा है,उसके बाद यहां आकर पानी व अन्य व्यवस्थाएं करनी पड़ रही है।
गौरतलब है कि 44 पंचायतों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव विच्छेदन गृह बना है। क्षेत्र में होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान शवों को विच्छेदन का कार्य करने के लिए यहां लाया जाता है। रात्रि के समय यहां पर शवों को रखना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि खिड़कियां टूटी होने के चलते जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। बिजली और पानी की व्यवस्था न होने के बावजूद परिजनों को वीराने में यहां रात काटनी पड़ रही है।
ग्रामीण रोहित शर्मा, ईश्वर चंद शर्मा, कमल देव शर्मा, संगड़ाह महिला मंडल प्रधान मीरा चौहान ने इस शव गृह की खस्ता हालत पर चिंता व्यक्त की है। लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के गिरि पार इलाके में बने एकमात्र शवगृह भवन की हालत सुधारने का आग्रह किया है।
पीएचसी संगड़ाह के शव विच्छेदन गृह के खस्ताहाल भवन का मामला उनके संज्ञान में है। इस बारे में खंड चिकित्सा अधिकारी संगड़ाह को प्राक्कलन तैयार करने के लिए कहा गया है। प्राक्कलन रिपोर्ट के बाद इसकी मरम्मत के लिए राशि प्रदान की जाएगी।
-डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिरमौर।
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