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14 स्कूलों के बच्चों का शर्मिंदा हो रहा बचपन

Tue, 17 May 2016 11:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पांवटा साहिब (सिरमौर)
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। राज्य में नए स्कूल और शिक्षण संस्थान धड़ाधड़ खोले गए हैं लेकिन एक अदद शौचालय सरकार नहीं बना पा रही। हालात यह है कि स्कूल घास की झोंपड़ी में चल रहे हैं, जहां भवन बने हैं वहां शौचालय नहीं होने की वजह से बच्चे आज भी लघु और दीर्घ शंका से निवृत्त होने के लिए झाड़ियां तलाशते हैं। इससे सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को भी झटका लग रहा है।
हालात यह है कि कई स्कूलों के खुलने के 4 वर्षों बाद भी सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं दर्जनों स्कूलों में नहीं हैै। ‘अमर उजाला’ ने प्राथमिक व मिडल स्कूलों के तीन ब्लॉकों के आंकड़े एकत्र किए, जो बेहद चौकाने वाले हैं। स्वच्छता अभियान पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च करने की बातें होती रही हैं। हर स्कूल में शौचालय सुविधा के वायदे भी खूब किए जाते हैं लेकिन धरातल पर तस्वीर जरा भिन्न ही नजर आ रही है।
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मुख्यमंत्री ने स्वयं हर स्कूल में शौचालय बनाने के निर्देश दिए थे लेकिन बावजूद इसके कई स्कूल बिना शौचालय के चल रहे हैं। सिरमौर के ग्रामीण क्षेत्रों के इन कई स्कूलों में शौचालय सुविधा आज भी नहीं मिल पा रही है।

बॉक्स के लिए--
इन स्कूलों में आज भी शौचालय सुविधा नहीं...
पांवटा शिक्षा खंड के वर्ष 2012 से पहले खुले करीब एक दर्जन स्कूलों में शौचालय की सुविधा अब तक भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। इनमें राजकीय प्राथमिक पाठशाला फूलपुर, भूंगरनी, पट्टी नत्था सिंह, जंबू खाला, कांडो, गुरुवाला, भूड्डी, चिलौई, नारीवाला, हीरपुर, बांगरन व भाटांवाली शामिल हैं। वहीं, कफोटा ब्लॉक की प्राथमिक पाठशाला बाग तिलवाड़ी तथा सतौन ब्लॉक के बाना प्राथमिक पाठशाला में सैकड़ों विद्यार्थियों को शौचालय की कोई सुविधा नहीं मिली।
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उच्चाधिकारियों को समस्या से कराया है अवगत
उधर, शिक्षा विभाग के बीआरसी पांवटा बलबीर चौधरी, बीआरसी सतौन मंगी राम ठाकुर व बीआरसी कफोटा दलीप पुंडीर ने कहा कि कुछ प्राथमिक या मिडिल स्कूलों मेें शौचालय सुविधा नहीं है। इस बारे, शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। बजट का प्रावधान होने पर शौचालयों व पेयजल सुविधा से जोड़ा जा सकेगा।
 
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