नाहन(सिरमौर)। बारिश न होने से सिरमौर के किसानों में हाहाकार मच गया है। नवंबर का पूरा महीना भी बिना बरसे ही बीत गया। ऐसे में यदि दो-चार दिन के भीतर बारिश न हुई तो इस सीजन की फसल प्रभावित हो सकती है। अमूमन किसान 15 नवंबर तक क्षेत्र में गेहूं की बिजाई कर लेते थे लेकिन दिसंबर माह के शुरू हो जाने के बाद भी बारिश न होने से सिरमौर की भूमि पर गेहूं की बिजाई खटाई में पड़ गई है। अधिकांश क्षेत्रों में बिजाई शुरू भी नहीं हो पाई।
वहीं सरसों, तिलहन और दूसरी फसलों पर भी बारिश न होने का असर दिखने लगा है। जिला में पिछले करीब 3 महीने से बारिश नहीं हुई है जिस कारण सूख के हालात पैदा हो गए हैं। सिरमौर जिला के अधिकतर क्षेत्रों में किसान गेहूं की बिजाई का कार्य शुरू नहीं कर पाए हैं। केवल सिंचित भूमि वाले किसान ही खेतों में गेहूं की बुआई कर रहे हैं लेकिन मौसमी वर्षा पर निर्भर रहने वाले अधिकतर किसान बारिश के लिए आसमान का मुंह ताक रहे हैं।
तीन माह से बारिश न होने के चलते पेयजल योजनाओं में भी पानी की कमी है। खड्ड व दूसरे पेयजल स्रोत भी सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं। किसानों को डर है कि यदि आने वाले दो-तीन दिन के भीतर बारिश न हुई तो किसानों की समस्या और अधिक बढ़ जाएगी। उल्लेखनीय है कि सिरमौर जिला के अधिकतर किसान मौसमी वर्षा पर ही निर्भर हैं।
सिरमौर में किसान अमूमन 15 नवंबर के करीब गेहूं की बिजाई कर लेते थे लेकिन बारिश नहीं होने से बिजाई कार्य लेट हो गया। माना जा रहा है कि यदि जल्द ही क्षेत्र में बारिश न हुई तो किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर पाएंगे। किसान बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि खेतों में नमी हो और वह गेहूं की बिजाई कर सकें। किसानों के लिए तकलीफ देह बात यह है कि जिला के कई क्षेत्रों में बरसात के दिनों में पहले ही बारिश कम हुई थी जिस कारण कुहलों में एकत्रित पानी सूख चुका है। क्षेत्र का अधिकांश इलाका ऐसा है जहां सिंचाई योजना नहीं है। लोग सीधे तौर पर आसमानी पानी पर ही निर्भर हैं। बारिश न होने के कारण क्षेत्र के किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें उत्पन्न हो गई हैं। किसानों के खेत खाली पडे़ हुए हैं।
गिरिपार क्षेत्र के संगड़ाह, पच्छाद, राजगढ़, कमरऊ, बडवास, दुगाना, शिल्ला, मस्तभोज, जेलभोज व शिलाई क्षेत्र के अनेकों गांवों में वर्षा न होने के कारण गेहूं, जौ व अन्य फसलों की बिजाई कार्य रुका पड़ा है। बिजाई का समय जैसे-जैसे निकला जा रहा है वैसे-वैसे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें भी गहरी होती जा रही है।
गत वर्ष भी किसान इस मौसम में बरसात न होने के कारण गेहूं व अन्य फसलों से वंचित रह गए थे। क्षेत्र में गेहूं की पैदावार नाममात्र की ही हुई थी। क्षेत्र के किसानों देशराज, प्रदीप, आकाश, सुबाथु, दूलो राम ने बताया कि यदि दो-तीन दिन के भीतर बारिश नहीं हुई तो वह बिजाई नहीं कर पाएंगे।
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