ग्राउंड रिपोर्ट
दो साल से बंद पड़ा बंदर नसबंदी केंद्र, शहर में बढ़ता जा रहा बंदरों का आतंक
घरों में घुसकर खाने-पीने का सामान उठा रहे बंदर, हर साल सैकड़ों लोग हो रहे हमलों का शिकार
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब शहर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि उत्पाती बंदर अब केवल बाजारों और सड़कों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि घरों के भीतर घुसकर रसोई से खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं। कई बार फ्रिज तक खोलकर सामान निकालने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। राह चलते लोगों, महिलाओं और स्कूली बच्चों पर हमला कर उन्हें घायल करना भी आम बात बन गई है। दूसरी ओर, बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए करीब 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित बंदर नसबंदी (मंकी स्टरलाइजेशन) केंद्र पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है। केंद्र में ताले लटके होने से शहरवासियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
वन विभाग ने करीब एक दशक पहले सिविल अस्पताल पांवटा साहिब के समीप बंदर नसबंदी केंद्र स्थापित किया था। यहां बंदरों को पकड़कर उनकी नसबंदी की जाती थी और बाद में उन्हें उनके प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ दिया जाता था। इस अभियान के तहत हजारों बंदरों की नसबंदी की गई थी, जिससे उनकी संख्या पर काफी हद तक नियंत्रण रहा, लेकिन पिछले दो वर्षों से अभियान पूरी तरह ठप पड़ा है।
नगर परिषद के सभी 13 वार्डों के अलावा आसपास के क्षेत्रों में बंदरों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह-शाम घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है। कई महिलाएं और बुजुर्ग बंदरों के डर से छतों और आंगनों में अकेले जाने से बचते हैं। हर वर्ष सैकड़ों लोग बंदरों के काटने और हमले का शिकार हो रहे हैं, जिससे उन्हें एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं।
स्थानीय निवासी पंकज भटनागर, सलमान, बलदेव सिंह, सुरजीत सिंह, मोनिका, रेखा शर्मा, पवन कुमारी और बबीता का कहना है कि पहले नगर परिषद और वन विभाग संयुक्त रूप से बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाते थे, जिससे लोगों को राहत मिलती थी। पिछले दो वर्षों से यह अभियान बंद है। उन्होंने मांग की है कि जल्द विशेष अभियान चलाकर बंदरों की संख्या नियंत्रित की जाए।
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बजट नहीं मिलने से रुका अभियान
वन प्रभागीय अधिकारी पांवटा साहिब वेद प्रकाश ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बंदर पकड़ने के लिए बजट का प्रावधान नहीं हुआ है। इसके चलते ऊना से विशेषज्ञ टीम नहीं बुलाई जा सकी। नगर परिषद की ओर से बजट उपलब्ध होने पर वन विभाग दोबारा अभियान शुरू कर सकता है।
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नगर परिषद बैठक में उठेगा मुद्दा
नगर परिषद अध्यक्ष निर्मल कौर और उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह मिक्का ने कहा कि बंदरों की बढ़ती समस्या लोगों की ओर से उनके संज्ञान में लाई गई है। आगामी नगर परिषद बैठक में इस विषय पर चर्चा की जाएगी और वन विभाग के साथ समन्वय कर समस्या के स्थायी समाधान का प्रयास किया जाएगा।
संवाद