शिलाई (सिरमौर)। हिमाचल अज्ञैर उत्तराखंड के कई गांवों में तीन दशक पूर्व बंद हुए मोण उत्सव का आयोजन हुआ। मोण उत्सव में सिरमौर जिले के झकांडो व कांडो भटनोल, शिमला जिला के धमरोली-बिगरोली व उत्तराखंड के बाइला व तिनोऊ आदि गांवों के लोग अंबोटा के समीप भंगाल खड्ड में एकत्रित हुए और मोण उत्सव मनाया।
इस दौरान द्राबिल गांव के महासू देवता भी उत्सव में उपस्थित रहे। शुक्रवार को महासू देवता द्राबिल से झकांडो होते हुए मीनस पहुंचे। यहां से चारों खुंद चंदोऊ, झोगटियाल, तिनोऊ, धमरोऊ-बिगरोऊ भंगाल खड्ड के टिंबर शिला पर पहुंचे। इस दौरान देवता की पूजा आराधना की गई।
करीब तीन दशक पूर्व इस पर्व को विवादित होने के कारण बंद कर दिया गया था। बताया जाता है कि टिंबर शिला पर ढेरी लगाई जाती है। टिंबर गिराते समय झगड़े का भय भी बना रहता था। लिहाजा इसे बंद किया गया था। इस दौरान पौराणिक गीत ‘मेरे मोणों खे आया रे’ गाया गया। नंबरदार उजागर सिंह, जालम सिंह, नैन सिंह ने बताया कि तीन दशक पूर्व किसी विवाद के कारण इस उत्सव को बंद किया गया था। शुक्रवार को मोण का उत्सव शांतिपूर्वक ढंग से संपन्न हुआ।