जेसीबी के लिए अनुमति लेना बना टेढ़ी खीर, दो साल के लिए जमा करवाने पड़ रहे 15 लाख
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। जिला सिरमौर में संचालित स्टोन क्रशरों पर मजदूरों का पलायन जोरों पर है। इसके चलते क्रशरों पर रेत-बजरी उत्पादन बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में क्रशर मालिकों की भी परेशानी बढ़ गई है। क्रशर बंद होने से सरकार को भी राजस्व का घाटा होता नजर आ रहा है।
बता दें कि सिरमौर में तीन दर्जन स्टोन क्रशर हैं। इनमें ज्यादातर लघु स्टोन क्रशर हैं। पिछले कई दिनों से कुछ स्टोन क्रशर बंद देखे जा रहे हैं। इसका कारण मजदूर नहीं मिलना बताया जा रहा है। बीते एक साल से क्षेत्र में टैक्ट्ररों पर मॉडिफाइड कर जेसीबी का काम किया जाता रहा है। इससे मजदूरों की कमी पूरी होती रही। इन दिनों टम-टम के अवैध संचालन पर रोक लगाई गई है, जिसके चलते न तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही रेत बजरी खनन करने का कोई अन्य विकल्प। हालांकि मजदूर नहीं मिलने पर यहां के क्रशर मालिकों ने सरकार से जेसीबी लगाकर खनन करने की अनुमति मांगी है। सरकार ने क्रशरों पर जेसीबी मशीन लगाने की अधिसूचना भी जारी कर दी है। मामला जब खनन विभाग में पहुंचा तो विभाग ने जेसीबी लगाने की अनुमति के लिए कई बंदिशें लागू कर दीं। इसमें दो साल की अनुमति के लिए 15 लाख रुपये पहले जमा करने होंगे। इसके अलावा 25 से 30 लाख की जेसीबी अन्य खर्चे लगाकर 50 लाख खर्च करने पर ही जेसीबी की अनुमति मिल सकती है।
स्टोन क्रशर संचालकों का मानना है कि दो साल की अनुमति में बरसात के तीन महीने में खनन करने पर प्रतिबंध लगा है। ऐसे में छह महीने काम बंद रखना पड़ता है। स्टोन क्रशर यूनियन के अध्यक्ष मदन मोहन शर्मा ने बताया कि जल्दी ही सरकार से इस गंभीर मुद्दे को लेकर बात की जाएगी।
लीजों में जेसीबी मशीन लगाने की अनुमति दी जा रही है। इसके लिए एकमुश्त 15 लाख रुपये जमा करने होंगे। दो साल की अनुमति लेने से बार-बार परमिशन लेने का झंझट नहीं होगा। बरसात के तीन महीने खनन कार्य बंद रहेगा। -कुलभूषण शर्मा, जिला खनन अधिकारी, सिरमौर