सरकारें और अधिकारी बदलते रहे, लेकिन इस पाठशाला की तकदीर संवारने वाला कोई खेवनहार सामने नहीं आया। स्कूल भवन के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की योजनाएं वर्षों से केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई हैं। मेरा गांव मेरा देश संस्था के संचालक अनुराग गुप्ता और अध्यक्ष पुष्पा खंडूजा ने बताया कि प्राथमिक पाठशाला मटक माजरी की स्थिति बेहद दयनीय है। वर्ष 2009 से शुरू हुए इस स्कूल में छात्र बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं।
पंचायत के सामुदायिक भवन के इकलौते कमरे में ही पहली से पांचवीं तक की पांच कक्षाएं लगती हैं। इसी एक कमरे में स्कूल का स्टोर रूम है और यहीं शिक्षकों का स्टाफ रूम तथा कार्यालय भी संचालित होता है। यदि स्कूल का अपना भवन बने, तो यहां छात्रों की संख्या में इजाफा हो सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग सुध नहीं ले रहा है। शुरुआत के समय इस विद्यालय में 30 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव और बदहाली के चलते अब केवल 11 बच्चे ही शेष रह गए हैं।
स्कूल में बेहतर शौचालय तक की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों के सहयोग से केवल गड्ढे व पाइप की कामचलाऊ व्यवस्था की गई है। वर्तमान में इस विद्यालय में दो अध्यापक और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं।
17 वर्षों से स्कूल सामुदायिक भवन के एक कमरे में ही चल रहा है और वर्तमान में छात्रों की संख्या घटकर 11 रह गई है। स्कूल भवन के लिए जमीन का प्रावधान नहीं हो पा रहा है। इस पूरी स्थिति से शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है। -शिप्रा सैनी, स्कूल प्रभारी
पूर्व में भी स्कूल भवन के लिए भूमि उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। हालांकि, अभी तक मटक माजरी स्कूल भवन के लिए उपयुक्त भूमि का बंदोबस्त नहीं हो सका है। -रामपाल, बीईईओ, माजरा