-जिले के मैदानी क्षेत्रों में गेहूं के खेत बिना दाना पके लगे सूखने, काला पड़ने लगा रंग
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। सिरमौर के मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की फसल पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। एक तरफ मौसम खराब होने से किसानों की चिंता बढ़ी है तो वहीं दूसरी तरफ फसल में झुलसा रोग से फसल बिना दाना पके ही सूखने लगी हैं। इसके साथ ही कनाल बंट रोग लगने का अंदेशा भी बना हुआ है।
बता दें कि दो सप्ताह से लगातार मौसम में फेरबदल के चलते तापमान में गिरावट जारी है। इसका असर बागवानों और किसानों की फसलों पर पड़ रहा है। दो माह पहले से बारिश न होने से तापमान 26 डिग्री पार कर चुका था। इसके बाद अचानक मौसम बदला और बारिश पड़ने से तापमान गिरकर 16 डिग्री तक पहुंच गया। फसल में नमीं रहने के बाद अब रोग लगना शुरू हो गया है। इससे गेहूं का रंग बदल गया है।
बताया जा रहा है कि इन दिनों गेहूं में दाना बनना शुरू हुआ था कि एक दम से खेतों में खड़ी फसल काली पड़ने लगी है। कहीं-कहीं गेहूं के खेतों में सफेद बालियां आ रही हैं। इसमें दाना ही नहीं बना है। ऐसे में गेहूं की फसल उत्पादन में भारी कमी आने के संकेत मिल रहे हैं।
किसानों लाल सिंह, राम किशोर, बिंदु, काका, सतपाल सिंह ने बताया कि जिस खेत में गेहूं काली दिखाई दे रही है उसमें दाना भी काला पड़ गया है। इसे कनाल बंट रोग लगने का संकेत माना जा रहा है।
किसानों ने बताया कि बीते साल धान की फसल रोग लगने से खत्म होने पर किसानों को लाखों का नुकसान पहुंचा है। इसके बाद अब गेहूं की फसल पककर तैयार हो रही थी कि अचानक बीमारी से फसल खराब होने लगी है।
उधर, कृषि विभाग सिरमौर के उप निदेशक साहब सिंह ने बताया कि गेहूं अब पककर 10 दिनों बाद कटाई शुरू होने वाली है। जिस खेत में ज्यादा समय तक पानी खड़ा रहा है या फिर खेत में खाद कि मात्रा ज्यादा रही है, वहां ऐसी शिकायत आ जाती है। गेहूं पकने पर इसका इलाज नहीं है। उन्होंने बताया कि टीम भेज कर जांच की जाएगी।
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