पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले के अंतर्गत पुरुवाला डिविजन की कलाथा-बढाणा सिंचाई योजना विभागीय अनदेखी और सरकारी प्रणाली की उदासीनता का शिकार होकर रह गई है। करोड़ों रुपये से तैयार यह योजना हकीकत में सफेद हाथी बनी हुई है।
साल 2004 में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह ने क्षेत्र के ग्रामीणों को सिंचाई सुविधा देने के मकसद से इस योजना का शिलान्यास किया था। इसका मकसद ग्राम पंचायत कलाथा बढाणा, बेलधार और हथोरा के किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करना था। वीरभद्र सिंह के सपनों की यह योजना आज धीरे-धीरे दम तोड़ रही है। विभाग और सरकार की अनदेखी के कारण ग्रामीणों की लगभग 1200 बीघा उपजाऊ जमीन इससे प्रभावित है।
ग्रामीणों के अनुसार दो करोड़ 98 लाख रुपये से 2016 में तैयार हुई यह योजना पहले ठेकेदार के माध्यम से टेंडर के तहत संचालित की जाती थी, लेकिन शुरूआती टेंडर की अवधि समाप्त होने के बाद से यह योजना बंद पड़ी है। विभाग ने न तो नया टेंडर जारी किया और न ही स्वयं इस योजना का कार्यभार संभाला हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को इस सिंचाई योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
स्थानीय निवासी मोहन सिंह तोमर ने बताया कि हैरानी की बात तो यह है कि खेतों में पाइप लाइन और कूहल का भी इंतजाम नहीं हैं। जबकि इस योजना को तैयार होने में दो करोड़ 98 लाख रुपये की राशि खर्च हुई है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जमीन पर किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
स्थानीय निवासी मोहन सिंह तोमर, केदार सिंह तोमर, संजय सिंह, शेर सिंह, चतर सिंह, ओमप्रकाश, बलवीर सिंह, चरण सिंह, प्रदीप कुमार, रघुवीर सिंह, उदयराम, पूर्ण सिंह आदि ने मांग की है कि शीघ्र ही विभाग उक्त योजना को स्वयं चलाकर किसानों की खेती को योजना का लाभ दें। इसके अलावा किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन और कूहल की मरम्मत कराई जाए।
विभाग के एसडीओ परमिंद्र सिंह ने बताया कि विभाग के पास साधन की कमी है, कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है। आउटसोर्स करने का प्रयास किया गया था लेकिन अभी इसकी स्वीकृति नहीं आई है। उन्होंने कहा कि विभाग पूरा प्रयास कर रहा है कि इस योजना को सुचारू किया जाए।
-संवाद