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Sirmour News: कफोटा–कोटी सड़क पर शुरू हुआ टारिंग का काम

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एफडीआर तकनीक से तैयार की गई कफोटा-कोटी सड़क। संवाद
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-आधुनिक एफडीआर तकनीक से बन रही सड़क
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-एनएच 707 बंद होने पर उत्तराखंड जाने का है वैकल्पिक रास्ता

सुंदर चौहान

कफोटा (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश को उत्तराखंड से जोड़ने वाली कफोटा–कोटी सड़क के सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू हो गया है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इस सड़क का निर्माण पहली बार आधुनिक एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से किया जा रहा है।

नाबार्ड से वित्तपोषित इस परियोजना पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। परियोजना के तहत करीब 30 किलोमीटर सड़क की कटिंग, टारिंग और अन्य सुधार कार्य किए जा रहे हैं। यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-707 बंद होने की स्थिति में उत्तराखंड जाने के लिए महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी इस्तेमाल होता है।
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लोक निर्माण विभाग के अनुसार इस सड़क के बनने से गिरिपार क्षेत्र की लगभग 22 पंचायतों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। विभाग इस तकनीक को एक नमूना परियोजना (मॉडल प्रोजेक्ट) के रूप में भी विकसित कर रहा है, ताकि भविष्य में अन्य सड़कों के निर्माण और मरम्मत में भी इसका उपयोग किया जा सके।

एफडीआर यानी फुल डेप्थ रिक्लेमेशन एक आधुनिक सड़क निर्माण तकनीक है। इसमें पुरानी सड़क की सामग्री जैसे डामर, कंकड़ और मिट्टी को पूरी गहराई तक मशीनों से उखाड़कर उसी स्थान पर पुनर्चक्रित किया जाता है। इसके बाद इसमें सीमेंट व अन्य स्थिरकारी पदार्थ मिलाकर दोबारा मजबूत आधार तैयार किया जाता है और ऊपर से नई परत बिछाई जाती है।

इस प्रक्रिया में सड़क की मौजूदा सामग्री का लगभग 100 प्रतिशत पुनः उपयोग किया जाता है। इससे नई चट्टान या एग्रीगेट की आवश्यकता कम हो जाती है और निर्माण कार्य अपेक्षाकृत कम समय में पूरा किया जा सकता है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है। पुरानी सामग्री के पुनर्चक्रण से नई खनन सामग्री की जरूरत कम पड़ती है, जिससे खनन और प्रदूषण पर भी नियंत्रण रहता है।
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लोक निर्माण विभाग कफोटा सेक्शन के कनिष्ठ अभियंता आदित्य चौहान ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और खनन पर रोक को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में एफडीआर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे सड़क अधिक मजबूत और किफायती बनेगी तथा लंबे समय तक टिकाऊ रहेगी। संवाद
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