औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत हजारों प्रवासी कामगारों के लिए बने हॉस्टल
गोंदपुर, रामपुरघाट, बातामंडी और धौलाकुआं इकाइयों में हजारों प्रवासी कामगार कार्यरत
केंद्र, प्रदेश सरकार, श्रम विभाग इस मांग पर गंभीरता से करें विचार : सतीश गोयल
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। क्षेत्र की करीब डेढ़ सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयों में पांच हजार से अधिक प्रवासी कामगार कार्यरत हैं। पांवटा साहिब हिमाचल प्रदेश के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में से एक रहा है। पांवटा साहिब के गोंदपुर, रामपुरघाट, बातामंडी और धौलाकुआं क्षेत्र में कई औद्योगिक इकाइयां हैं। अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए विभिन्न प्रदेशों से कामगार खून पसीना बहा कर कार्य करते हैं। इनकी कमाई का काफी हिस्सा कमरों के किराये में चला जाता है। इसलिए कामगारों के लिए हॉस्टल की मांग जोर पकड़ने लगी है।
पिछले दो दशकों से उद्योगों में ठेकेदारी करने वाले रामलाल शर्मा, शाहबाज खान, प्रदीप सिंह, सुनील शर्मा, जेबिन्दर पाल, हेमराज व मोहसीन खान आदि ने बताया कि क्षेत्र में डेढ़ सौ से अधिक छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं। इसमें करीब 25 हजार के आसपास कंपनी या ठेकेदार के माध्यम से कार्य करने वाले कामगार हैं। इनमें से 6,000 से अधिक प्रवासी कामगार शामिल हैं।
कामगारों को हर माह न्यूनतम वेतन 12,750 रुपये मिलता है। सबसे ज्यादा दिक्कतें बाहरी राज्यों से परिवार को पालने के लिए पहुंचने वाले कामगारों को आती रहीं हैं। इतनी आय में से परिवार का भरण पोषण, बच्चों की पढ़ाई लिखाई, यहां पर किराये का कमरा, बिजली-पानी व राशन का खर्च पूरा करना कठिन हो जाता है। किराये का कमरा तीन से चार हजार में मिलता है। ऐसे में कामगारों के लिए पांवटा साहिब के गोंदपुर, रामपुरघाट, धौलाकुआं व बातामंडी-बहराल में हॉस्टल सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। इसके लिए केंद्र, राज्य सरकार, उद्योग तथा श्रम विभाग को मिल कर बजट प्रावधान करना चाहिए।
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केंद्र और राज्य सरकार को भेजेंगे मांग : सतीश गोयल
हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा साहिब इकाई अध्यक्ष सतीश गोयल व महासचिव नवीन अग्रवाल ने बताया कि इस बारे में केंद्र व राज्य सरकार को मांग पत्र भेजा जाएगा। यदि मांग पूरी होती है तो क्षेत्र में कार्यरत प्रवासी कामगारों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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अभी तक नहीं मिली कोई मांग : श्रम निरीक्षक
श्रम निरीक्षक पांवटा साहिब भूपेश कुमार शर्मा ने बताया कि अभी तक इस तरह की कोई मांग नहीं पहुंची है। यदि चैंबर ऑफ कॉमर्स से ऐसी कोई मांग पहुंचती है तो सरकार, श्रम एवं संबंधित विभाग को भेज दी जाएगी।
संवाद