पांवटा साहिब में ऊर्जा मंत्री से भेंट करतीं आशा कार्यकर्ता।
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। आशा कार्यकर्ताओं को अभी तक अगस्त माह का मानदेय नहीं मिला है। जबकि प्रदेशभर में कोरोना वॉरियर्स के तौर पर आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका सराहनीय रही है। एक बार फिर से संकट बढ़ने पर सक्रिय भूमिका निभाने के सरकार के आदेश हुए हैं। ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं ने ऊर्जा मंत्री चौधरी सुखराम के समक्ष अपनी मांगों और समस्याओं को रखा।
आशा कार्यकर्ताओं ने कैबिनेट मंत्री के सामने अपनी समस्याओं को रखा। उन्होंने कहा कि कार्य के दौरान उनके पास किसी तरह की कोई भी सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। जबकि, सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं को संक्रमितों से उपचार और जानकारी एकत्र करने को मिलना होता है। पूरा दिन क्षेत्र में काम करने के बाद मात्र 100 रुपये मिल रहे हैं जो सरकार द्वारा निर्धारित दैनिक भत्ता 255 रुपये से भी बेहद कम है। गर्भवती जनरल महिलाओं की देखभाल की 600 राशि 9 माह बाद मिलते थी, वो अब बंद कर दी गई है। जबकि आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी अब भी सभी गर्भवती महिलाओं की देखभाल की रखी गई है। कोरोना संकट में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली आशा वर्कर को अब तक अगस्त के बाद कोरोना संकट का मानदेय नहीं मिल पाया है। वहीं, एक बार फिर सरकार चाहती है कि आशा कार्यकर्ता इस वक्त हिमाचल प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर मैदान में उतरे और सर्वे कर लोगों का विवरण सरकार तक पहुंचाए।
इस मौके पर मीरा, बिंदु, ममता, रुबीना, पूनम चौधरी, सोनू, ज्योति, रीना, अनीता, मिलन जसविंदर, सोनिया, वर्षा, ऊषा और गुरशरण ने बताया कि कोरोना संकट के दौरान भी मात्र 1 हजार रुपये महीना मानदेय दिया गया। अगस्त के बाद मानदेय ही नहीं आ रहा है। उधर, ऊर्जा मंत्री चौधरी सुखराम ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की समस्याएं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष रखेंगे। प्रतिनिधिमंडल की ओर से रखी गईं मांगों को पूरा करवाने का हर संभव प्रयास होगा।