भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जिला इकाई ने जताया रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। पीरियड आधार पर गेस्ट टीचर रखना न्यायसंगत ही नहीं है। यह प्रदेश के लाखों शिक्षित युवाओं और बेरोजगारों के साथ धोखा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जिला सिरमौर इकाई ने इसका विरोध किया है। साथ ही सरकार से गेस्ट टीचर पॉलिसी पर पुनर्विचार का आग्रह किया।
संघ के जिलाध्यक्ष कपिल मोहन ठाकुर, जिला महामंत्री दीपक त्रिपाठी, जिला संगठन मंत्री श्यामलाल भटनागर, प्रांत उपाध्यक्ष विजय कंवर, ऋषिपाल शर्मा आदि पदाधिकारियों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का मूलभूत ढांचा ही चरमरा गया है। जिस गुरु को हमारा समाज सर्वोच्च सम्मान देता है, क्या उसकी हैसियत शिक्षण व्यवस्था में एक गेस्ट की ही रह गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में सरकार ने पहले ही एसएमसी, कंप्यूटर टीचर, वोकेशनल, आउटसोर्स और न जाने कितने ही वर्गों में अध्यापकों को विभाजित किया गया है। जो अपने भविष्य की राह देख रहे हैं।
जिला अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में पहले ही एसएमसी पर शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं। इनके लिए अभी तक सरकार की ओर से ठोस पॉलिसी नहीं बनाई है। यह अध्यापक बहुत कम वेतन में दूरदराज के क्षेत्रों में जिन विद्यालयों में नियमित शिक्षक जाने से गुरेज करते हैं उन विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं।
पॉलिसी के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में गेस्ट टीचर को 200 रुपये प्रति पीरियड, माध्यमिक में 250 रुपये, उच्च विद्यालय में 400 रुपये और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 550 रुपये प्रति पीरियड के हिसाब से दिया जाएगा। कपिल ने कहा कि उदाहरण के तौर पर यदि एक माध्यमिक विद्यालय के अध्यापक जो विज्ञान और गणित पढ़ाते हैं उनके 6 पीरियड बनते हैं। यानी एक दिन के 250 रुपये के हिसाब से 1500 और 25 दिन का 37,500 बन रहा है। एक रेगुलर अध्यापक जो कांटेक्ट पर लगता है उनके बराबर तनख्वाह होती है। इसलिए सरकार को नियमित भर्ती करवानी चाहिए।