रोडवेज बस और ट्रक में हुई आमने-सामने टक्कर।
गिरिपार क्षेत्र की सतौन ट्रक ऑपरेटर सोसायटी ने शुक्रवार से हड़ताल कर दी है। सतौन उद्योगों से माल ढुलाई का कार्य बंद कर दिया है, जिस कारण शुक्रवार को सतौन के उद्योगों में सन्नाटा छाया रहा।
उत्तर भारत की सबसे बड़ी चुना पत्थर की मंडी सतौन में लगभग दो दर्जन लघु उद्योग हैं जो कि पाउडर और पोल्ट्री ग्रिटस बनाती हैं। उद्योगों से बाहरी राज्यों तक माल ढुलाई का कार्य सतौन ट्रक सोसायटी करती है। उद्योग मालिक और ट्रक सोसायटी के आपसी तालमेल के चलते ट्रक सोसायटी 75 फीसदी मार ढुलाई का कार्य करती है। जबकि उद्योग 25 फीसदी कार्य अपने ट्रकों या अपनी सुविधा अनुसार करते हैं। इन दिनों कार्य पर मंदे की मार होने के कारण अब ट्रक सोसायटी 100 फीसदी माल ढुलाई का कार्य स्वयं करने का दावा कर रही है।
जानकारी के अनुसार उद्योग मालिक इस बात पर सहमत नहीं है और उन्होंने ट्रक सोसायटी के इस फरमान को मानने से इंकार कर रही है। सतौन के उद्योगपति जोगेंद्र चौहान ने बताया कि उद्योग मालिकों की एक बैठक हुई थी जिसमें सोसायटी की इस शर्त को नहीं माना गया है। उद्योग मालिकों और ट्रक सोसायटी के बीच शनिवार को एक बैठक रखी गई है।
सतौन ट्रक सोसायटी के अध्यक्ष सतीश चौहान ने बताया कि सोसायटी में वर्तमान समय में 105 ट्रक हैं जो कि भारी मंदे के दौर से गुजर रहें हैं। उद्योग मालिक उद्योगों से कमाई करने के बावजूद भी अपने ट्रकों से 25 फीसदी कार्य कर रहे हैं जिस कारण सोसायटी के कई ट्रकों को कार्य नहीं मिल पा रहा है। ट्रक मालिकों के ऊपर वित्त कंपनी का लाखों रुपये कर्ज है जिसे चुकाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जब तक कोई हल नहीं निकलता, तब तक सोसायटी के ट्रक मालिक ना तो उद्योगों से माल ढुलाई कार्य करेंगे और ना ही अन्य जगह से माल ढुलाई करेंगे।