लहसुन लगाने में नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे किसान
समय और पैसे की हो रही बचत
सुंदर चौहान
कफोटा (सिरमौर)। जिला सिरमौर सब्जी उत्पादन में जहां प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना रहा है वहीं जिले के लहसुन की भी बाजार में बड़ी मांग है। इसी के चलते यहां लगातार लहसुन की पैदावार बढ़ रही है और किसान नई-नई तकनीकों का भी प्रयोग कर रहे हैं। इस बार लहसुन की खेती में मल्चिंग शीट का प्रयोग किसान कर रहे हैं।
इस प्रकार आधुनिक खेती अपनाकर न केवल किसानों को आर्थिक लाभ होगा, वहीं बेहतर पैदावार की भी उम्मीद है। कफोटा उपमंडल की शिल्ला पंचायत के रिडाना गांव के संदीप चौहान ने बताया कि मल्चिंग शीट में लहसुन लगाने का प्रयोग पहली बार किया जो सफल साबित हुआ। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से लगे लहसुन के उत्पादन में चार गुणा वृद्धि हुई है और समय की बचत तथा लागत भी कम हो गई है।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक से लगे लहसुन पर फुव्वारा सिस्टम से सिंचाई करके अच्छी फसल ली जा सकती है। पहले यह तकनीक सिर्फ टमाटर, शिमला मिर्च की खेती में इस्तेमाल होती थी लेकिन अब लहसुन में भी इसे प्रयोग किया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि इस तकनीक से एक तो खरपतवार नहीं उगेगा वहीं निराई-गुडाई का झंझट भी खत्म हो जाएगा। इससे पहले किसान खुले खेतों में लहसुन की बिजाई करते थे इससे खरपतवार उग जाता था और उनको दो-तीन बार निराई गुडाई करनी पड़ती थी।
इससे जहां समय बर्बाद होता था वहीं मजदूर न मिलने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब यह झंझट खत्म हो गया है। इससे समय व पैसे दोनों की बचत हो रही है।
बता दें कि ट्रांसगिरि के कफोटा, शिलाई और राजगढ़ उपमंडल में बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती की जा रही है। सोलन सब्जी मंडी से मिली जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में हर साल 150-200 करोड़ का लहसुन उगाया जाता है। यह लहसुन दिल्ली, चैन्नई की मंडियों में जाता है। इतना ही नहीं विदेशों में भी इसकी अच्छी मांग है। लहसुन को सब्जी के अलावा पाउडर पेस्ट और दवाईयां बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। पांवटा साहिब में एक लहसुन प्रोसेसिंग युनिट लग रही है जहां पर हर साल 100 टन लहसुन की खपत होगी।
किसान प्रदीप सिंह, रमेश चंद, बलबीर सिंह लाल और नेतर सिहं ने बताया कि लहसुन की खेती आज मुनाफे का सौदा बन गई है।