अंतरराष्ट्रीय-रेणुकाजी मेले में हुई पारंपरिक बुडाह लोक नृत्य दलों की स्पर्धा
लोक नृत्य के साथ सिरमौरी वाद्य यंत्रों की धुनों ने बांधा समां
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले के प्रांगण में सोमवार को पारंपरिक बुडाह लोक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें बुडाह लोक नृत्य हानत (घाटों) का दल विजेता रहा। जबकि बुडाह लोकनृत्य दल सैंज ने दूसरा और भद्रास बुडाह लोकनृत्य दल गनोग ने तीसरा स्थान हासिल किया।
जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग और रेणुका विकास बोर्ड के तत्वाधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में जिला के आठ बुडाह पारंपरिक लोकनृत्य दलों ने अपनी प्रस्तुति दी और वाद्य यंत्रों की धुनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जिला भाषा अधिकारी कांता नेगी ने बताया कि सिरमौरी सभ्यता के आरंभिक इतिहास को लोक संगीत से ही जाना जा सकता है। बुडाह नृत्य सिरमौर में दिवाली के पर्व पर अमावस्या से भैया दूज तक किया जाता है। इस नृत्य के आरंभ में इसके इतिहास को भी गाया जाता है। इसके अनुसार बुडाह नृत्य को पांडवों ने श्री कृष्ण के परामर्श से समायोजित किया था।
इस नृत्य के समय ऐतिहासिक वीरगाथाएं, युद्ध गाथाएं व हारुलों का गायन किया जाता है। इस नृत्य का मुख्य आकर्षण इसकी पोशाक है, जिसमें चोलना, डांगरा, आभूषण से सुसज्जित लोक गायक बांसुरी हुडक थाली दमामु/दमांटु आदि वाद्यों के साथ झूम-झूम कर गायन व नृत्य प्रस्तुत करते हैं।
प्रतियोगिता के दौरान मंच संचालन दलीप वशिष्ठ ने किया, जबकि निर्णायक मंडल में डाॅ. देवराज शर्मा, ओपी शर्मा, डाॅ. किरण बाला शर्मा शामिल रहे। तहसीलदार ददाहू जय सिंह ठाकुर व तहसीलदार नाहन उपेंद्र दत्त चौहान ने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान हासिल करने वाले दलों को 15,000, 13,000 व 11,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। सैकड़ों दर्शकों ने इस प्रतियोगिता का लुत्फ उठाया।
-संवाद
अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेला में बुडाह लोकनृत्य दल की प्रतियोगिता में प्रस्तुति देते कलाका