पांवटा साहिब (सिरमौर)। वर्ष 2015-16 में करोड़ों रुपये की लागत से बने सिविल अस्पताल पांवटा में आज भी सुविधाओं की भारी दरकार है। 5 साल बीत गए हैं लेकिन अस्पताल में ऑपरेशन सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी है। अस्पताल को लंबे समय से एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाया है। ब्लड स्टोरेज यूनिट भी खराब पड़ा है, वहीं करीब चार वर्षों से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन कक्ष में भी ताला लगा हुआ है जिससे सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड टेस्ट प्रदान करने की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। बता दें कि करीब 5 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने करोड़ों रुपये की लागत से बने सिविल अस्पताल की चार मंजिला भवन का शुभारंभ किया था जिसमें अंतिम मंजिल में ऑपरेशन थियेटर भी बनाया गया था ताकि पांवटा और शिलाई समेत अन्य क्षेत्रों में होने वाले सड़क हादसों, गंभीर बीमारियों से ग्रसित रोगियों को स्थानीय अस्पताल में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध करवाया जा सके लेकिन आज दिन तक ऑपरेशन थियेटर शुरू नहीं हो सका है।
सिविल अस्पताल में औसतन 7 से 8 सौ तक ओपीडी रहती है। एनएच मार्गों, औद्योगिक क्षेत्रों, खनन क्षेत्रों समेत विभिन्न क्षेत्रों में हादसों का ग्राफ हर वर्ष बढ़ता आ रहा है जिसके चलते ऑपरेशन थियेटर सुविधाओं की दरकार लंबे अरसे से रही है। निजी अस्पतालों में मरीजों को महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि सरकार ने चार मंजिला भवन तो बना दिया लेकिन इस भवन में मूलभूत सुविधाओं को मुहैया नहीं कराया गया है। इससे मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं। उधर, सिविल अस्पताल पांवटा प्रभारी डॉ. संजीव सहगल ने बताया कि एनेस्थीसिया डॉक्टर का पद रिक्त है। इससे ऑपरेशन सुविधाओं को शुरू नहीं करवाया जा सका है। एनेस्थीसिया समेत अन्य रिक्त पदों और दिक्कतों के बारे में प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग को अवगत करवा दिया गया है।