संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन/संगड़ाह (सिरमौर)। जिला सिरमौर के जिला परिषद वार्ड नंबर-2 दाना घाटों को 30 वर्षों से लगातार आरक्षित रखे जाने का मामला गरमा गया है। ग्रामीणों ने इस वार्ड को सामान्य (ओपन पुरुष) वर्ग के लिए करने की मांग को लेकर माननीय मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश को जनहित याचिका के माध्यम से गुहार लगाई है।
गांव सांगना निवासी प्रताप सिंह रावत ने बताया कि 1995 से लेकर अब तक यह वार्ड कभी भी पुरुष ओपन (सामान्य) वर्ग के लिए नहीं आया है, जिससे स्वर्ण जाति के पुरुष लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1995-2000 तक ओपन महिला, 2000-2005 तक ओबीसी, 2005-2010 तक ओपन महिला, 2010-2015 व 2015-2020 तक अनुसूचित जाति महिला और 2020-2025 तक ओबीसी महिला के लिए यह वार्ड आरक्षित रहा। इस बार के रोस्टर में भी इसे महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
याचिकाकर्ता प्रताप सिंह रावत ने कहा कि जब माननीय उच्च न्यायालय ने रोस्टर बदलने के आदेश दिए थे, तो कई सीटों पर आरक्षण बदला गया, लेकिन वार्ड नंबर दो दाना घाटों में कोई फेरबदल न होने से स्थानीय लोगों की जनभावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। संविधान के तहत सबको चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन इस वार्ड में लगातार भेदभाव किया जा रहा है।
प्रताप रावत ने मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय शिमला से विनम्र निवेदन किया है कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार जिला परिषद वार्ड नंबर-2 दाना घाटों को पुरुष ओपन (सामान्य) के लिए घोषित किया जाए। इस आशय की प्रतिलिपि रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय, जिला उपायुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी सिरमौर को भी प्रेषित की गई है।
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