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Sirmour News: अदालत

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बेटी के जन्म के बाद पत्नी के साथ बढ़ा उत्पीड़न
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कोर्ट से पीड़ित महिला और बच्ची को मिला हक
- फैमिली कोर्ट का निर्णय, पत्नी को हर महीने 2,500 और बेटी को 1,500 रुपये देने के आदेश
- पति पर दहेज उत्पीड़न और मारपीट के लगे हैं आरोप
- पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता पति : अदालत

संवाद न्यूज एजेंसी

नाहन (सिरमौर)। दहेज उत्पीड़न और मारपीट के आरोपों के बीच फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पीड़ित महिला और उसकी नाबालिग बेटी को अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने पति को निर्देश दिए हैं कि वह पत्नी को हर महीने 2,500 और नाबालिग बेटी को 1,500 की राशि अदा करे। यह राशि याचिका दाखिल करने की तारीख से अंतिम निर्णय तक नियमित रूप से दी जाएगी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पति किसी भी परिस्थिति में पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
पीड़ित शिखा की शादी 4 दिसंबर 2022 को हरियाणा के अंबाला निवासी गौरव सैनी के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष पर दहेज को लेकर प्रताड़ित करने के आरोप लगे। आरोप लगाया कि उससे मोटरसाइकिल (बुलेट), एसी समेत कई सामान की मांग की गई और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान किया गया। महिला का कहना है कि 2 नवंबर 2023 को बेटी के जन्म के बाद ससुराल वालों का व्यवहार और अधिक कठोर हो गया।
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आरोप है कि 6 जून 2024 और फिर 10 अप्रैल 2025 को मारपीट कर उसे बच्ची सहित घर से निकाल दिया गया। वहीं पति ने सभी आरोपों से इन्कार किया है। उसका कहना है कि पत्नी खुद अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी शिक्षित है और खुद कमाने में सक्षम है।
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अदालत की सख्त टिप्पणी :
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह नहीं माना जा सकता कि महिला अपनी इच्छा से नाबालिग बच्ची के साथ मायके में रह रही है। ऐसे मामलों में विस्तृत जांच बाद में होगी, लेकिन फिलहाल महिला और बच्ची के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की है। कोर्ट का यह फैसला ऐसे मामलों में स्पष्ट संदेश देता है कि प्राथमिक स्तर पर महिला और बच्चे को सुरक्षा और आर्थिक सहायता सर्वोपरि है।
संवाद
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