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पांवटा साहिब वैली के मैदानी इलाकों में रोग की चपेट में धान

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पांवटा वैली के फतेहपुर में धान का निरीक्षण करते केवीके धौलाकुआं के वैज्ञानिक डा. सौरव शर्मा। संव? - फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। जनपद सिरमौर की पांवटा साहिब वैली के कुछ मैदानी इलाकों में धान की फसल रोग की चपेट में आ गई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि जिन क्षेत्रों में मई-जून में धान की रोपाई की गई थी उन क्षेत्रों में पत्ते पीले पड़ने शुरू हो गए हैं। कई किसान फसल के नमूने लेकर कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं का रुख कर रहे हैं।
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बताया जा रहा है कि धान में फंगस लगा है। कई जगह जड़ में कीड़ा लगने से इसका विकास रुक गया है। ये समस्या पांवटा वैली के साथ-साथ सिरमौर से सटे उत्तराखंड के कई गांवों में आ रही है। दोनों क्षेत्रों की एक जैसी जलवायु होने के कारण धान पर प्रभाव भी वैसा देखने को मिल रहा है।
बता दें कि पांवटा वैली में 5000-6000 हेक्टेयर भूमि पर धान की पैदावारी की जा रही है। इस क्षेत्र से 20,000 मीट्रिक टन धान का उत्पादन हर साल होता है। कृषि उपनिदेशक डॉ. राजेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि केवीके के सहयोग से रिपोर्ट ली जा रही है। अभी कुछ क्षेत्रों में इस तरह की समस्या की सूचना मिली है। रोग के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
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उत्तराखंड और पांवटा वैली में एक जैसी समस्या
कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर (धौलाकुआं) के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि मैदानी क्षेत्रों से धान के रोगग्रस्त होने की सूचना के बाद वैज्ञानिक खेतों में निरीक्षण कर इसके नियंत्रण के उपाय बता रहे हैं। नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, देहरादून स्थित ढकरानी से भी संपर्क किया गया, वहां के कई गांवों में भी यही समस्या आई है।
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कुर्सी छोड़ खेतों में पहुंच रहे वैज्ञानिक
अधिकांश क्षेत्रों में रोग की चपेट में आई धान का निरीक्षण करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के वैज्ञानिक कुर्सी छोड़ खेतों में डट गए हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सौरव शर्मा और डॉ. शिवाली धीमान ने बताया कि जिन किसानों ने धान की रोपाई मई और जून के प्रथम सप्ताह में की है उसमें ज्यादा समस्या आ रही है।
इसमें दिन का तापमान सामान्य से अधिक होना, कई वर्षों से एक ही फसल चक्र, एक किस्म का बार-बार इस्तेमाल और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, धान की जड़ों में कीड़े के प्रकोप से ये समस्या आई है। इसके लिए किसानों को मौके पर जाकर रोग की रोकथाम के उपाय बताए जा रहे हैं।

पांवटा साहिब के केदारपुर में धान के खेत का निरीक्षण करतीं केवीके की वैज्ञानिक। संवाद- फोटो : NAHAN

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