सतौन(सिरमौर)। गिरिपार क्षेत्र का कोटगा गांव चारों तरफ से आग की लपटों से घिर गया है। गांव की महिलाओं व बच्चों ने मिल कर आग पर काबू पाने के प्रयास किया जिससे फिलहाल रिहायशी मकान, मवेशियों व फसलों को आग की चपेट में आने से बचाया जा सका।
गांवों के चारो ओर पिछले तीन दिनों से चल रहा आग का कहर गांव के नजदीक पहुंच चुका था। गांव के समीप रखे गोबर के ढेर में तो आग लग चुकी थी लेकिन महिलाओं की होशियारी से आग पर काबू पा लिया गया जिस कारण गांव की फसल और घरों को आग से बचाया गया।
स्थानीय ग्रामीणों अनुज शर्मा, राजेंद्र शर्मा, सुरेश कुमार, कपिल शर्मा, महेंद्र शर्मा, सतपाल व प्रमोद ने बताया कि आगजनी से गांव को खतरा पैदा हो गया था। गांव के सभी ग्रामीण जो आसपास बास(उपगांव) में बसते हैं। आगजनी से घिरे गांव को बचाने मौके पर पहुंच गए। दिन व रात को भी गिरिपार क्षेत्र के कफोटा रेंज के जंगलों में आगजनी हो रही है जिस कारण क्षेत्र में चारों ओर धुएं का गुबार छाया हुआ है।
कफोटा रेंज के कोटगा गांव के चारों ओर 3 दिनों से आगजनी हो रही है। कोटगा गांव चोटी के शिखर पर बसा एक छोटा सा गांव है। इसके आसपास घासनियों व जंगल क्षेत्र लगता है। इन दिनों गांव के चारों ओर से आग की लपटें उठ रही हैं। गांव की शामलात व निजी घासनी में आग का कहर बरपा है। ग्रामीणों का सारा सूखा घास जल कर राख हो चुका है। अब आग गांव के नजदीक पहुंच गई। गांव के पास गोबर के ढेर भी आग में जल गए। वीरवार को दिन के दोपहर की कढ़ी धूप में गांव की महिलाओं ने गांव के 1 से 2 किमी दूर स्टोर टैंक से पानी ढोकर लाया जिससे आग को गांव के खेतों तक जाने से रोका जा सका। तब जाकर किसी तरह गांव के रिहायशी मकान व फसलें बचाई जा सकीं। हालांकि भयभीत ग्रामीण अभी भी गांव के आसपास 24 घंटे पहरा दे रहे हैं।
उधर इस संदर्भ में जाजली बीट गार्ड इंदर सिंह ने बताया कि अभी तक गांव की निजी भूमि में आग लगी थी। करीब लगभग 25 हेक्टेयर भूमि में आग लगी है। इस समय सालग, भीतर गांव के जंगल में आग लगी है जिसको काबू करने को वन विभाग के कर्मी प्रयास कर रहे हैं।
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