पांवटा साहिब (सिरमौर)।
उत्तराखंड-हिमाचल की सीमा पर यमुना नदी में खनन माफिया दबंगई पर उतर आया है। यमुनानदी में लगी बुर्जियों को खनन माफिया ने हटा दिया है। पड़ोसी राज्य का खनन माफिया हिमाचल सीमा में 200 मीटर भीतर तक पहुंच गया है। दिन रात हो रहे अवैध खनन के कारण एनएच-7 पर बनें पुल, धार्मिक स्थल श्रीराधा-कृष्ण हनुमान मंदिर और यमुनाघाट को भी खतरा पैदा हो गया है। बरसात में नदी का रुख मुड़ने पर रिहायशी इलाकों में तबाही हो सकती है लेकिन विभाग अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
हिमाचल-उत्तराखंड राज्यों की करीब 31 किलोमीटर सीमा मीनस से लेकर पांवटा तक साथ लगती है जिसमें करीब 21 किलोमीटर क्षेत्र नदी में अवैध खनन के लिए संवेदनशील है। कई बार सीमा को लेकर विवाद चलता रहा। 2-3 वर्ष पहले यमुना नदी में डिमारकेशन हुई है। यमुनाघाट पांवटा तक विवादित स्थलों के बीच बुर्जियां स्थापित कर दी गईं।
हालांकि, बरसात में यमुना में बाढ़ आने पर बुर्जियां बहने का खतरा रहता है लेकिन देश भर में प्रसिद्ध पांवटा धार्मिक स्थल के यमुनाघाट में बुर्जियां नदी के बीचों बीच नजर आती थीं लेकिन, अब राज्य की सीमा पर यमुनाघाट से अधिकतर बुर्जियां गायब हैं। एसडीएम को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। बुधवार को भी धड़ल्ले से खनन सामग्री निकालने का कार्य चलता रहा।
उधर, जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने यमुना नदी के बीच बुर्जियां लगाई गई थीं जो उत्तराखंड के अवैध खननकारियों ने हटा दी हैं। इसकी लिखित शिकायत उत्तराखंड के विकासनगर प्रशासन को भेज दी है। हिमाचल क्षेत्र में अवैध खननकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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अवैध खनन के खिलाफ होगी कार्रवाई : एसडीएम
एसडीएम पांवटा एलआर वर्मा ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी। उत्तराखंड के विकासनगर प्रशासन को भी अवैध खनन पर अंकुश लगाने को कहा गया है।