अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)।
हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर अवैध खनन कोई नई बात नहीं है लेकिन खनन माफिया देश विदेश में चर्चित धार्मिक स्थलों के आसपास भी पहुंच रहे हैं जिसमें देहरादून-पांवटा एनएच-7 पर बना यमुना पुल व गुरुद्वारा साहिब पांवटा के समीप यमुनाघाट स्थल शामिल है। इन स्थलों से सैकड़ों ट्रैक्टर अवैध रेत बजरी के पड़ोसी राज्य उत्तराखंड पहुंच रहे है। खनन माफिया की जड़े काफी मजबूत है। किसी भी तरह की छापेमारी की भी सूचना लीक होकर खननकारियों तक पहुंच जाती है।
शनिवार को भी मौके पर 10 ट्रैक्टर अवैध खनन कर रहे थे लेकिन दूर से वाहन आते ही आधा
दर्जन ट्रैक्टर विस्तृत नदी सीमा से भाग खड़े हुए। बता दें कि दो राज्यों की सीमा पर पवित्र धार्मिक गुरुद्वारा साहिब पांवटा, श्री राधा-कृष्ण हनुमान मंदिर के साथ ही, यमुनाघाट भी अवैध खननकारियों के निशाने पर आ चुका है।
पिछले एक सप्ताह से रोज सैकड़ों ट्रालियां अवैध रेत बजरी की उत्तराखंड सीमा में पहुंच रही है। हैरानी इस बात की है कि इस स्थल से केवल 500 मीटर दूरी पर सामने ही उत्तराखंड विकासनगर के कुल्हाल चेकपोस्ट बैरियर पर पुलिस की चौकी है लेकिन खनन माफिया के हौसले बुलंद है। बेधड़क दिनदिहाड़े बिना किसी डर व रोक टोक के रेत बजरी अवैध खनन कार्य कर रहे हैं। दो राज्यों की सीमा का पूरा फायदा अवैध खननकारी उठाने में जुटे हैं जिससे एक राज्य की तरफ से कार्रवाई होने पर आराम से दूसरे राज्य की सीमा में भाग खड़े होते हैं। इन स्थलों पर केवल दोनों राज्यों की संयुक्त कार्रवाई से ही सफलता मिल सकती है।
उधर, जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने कहा शिकायत मिलने पर संयुक्त कार्रवाई शनिवार को की गई जिसमें हिमाचल पुलिस-खनन विभागीय टीम व उत्तराखंड पुलिस शामिल रही है। भविष्य में भी अवैध खनन के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई जारी रहेगी।