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Sirmour News: मोबाइल टावर की जमीन विवाद पर नए सिरे से सुनवाई के आदेश

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जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर की मध्यस्थता अपील मंजूर, जिला अदालत ने निचली अदालत का आदेश पलटा
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मूल समझौते की प्रति पेश न होने के आधार पर आवेदन खारिज करना कानूनी रूप से उचित नहीं : अदालत

संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिला एवं सत्र न्यायालय ने मोबाइल टावर से जुड़े जमीन और किराये के विवाद में जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नई मुंबई, महाराष्ट्र को राहत देते हुए निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया है। जिला जज योगेश जसवाल ने कंपनी की सिविल मिसलेनियस अपील मंजूर करते हुए मामला दोबारा निचली अदालत को भेजा है। अदालत ने निर्देश दिए कि मध्यस्थता के लिए दायर आवेदन पर अब कानून के अनुसार मेरिट के आधार पर नए सिरे से सुनवाई की जाए।
तहसील नाहन निवासी रमेश शर्मा ने अदालत में जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ जमीन पर लगाए गए मोबाइल टावर को हटाने और जमीन का कब्जा वापस दिलाने की मांग की थी। याचिका में मार्च 2018 से बकाया किराये के रूप में 2,83,745 रुपये, आगे 10 प्रतिशत की वृद्धि और 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग भी की गई थी। कंपनी ने लिखित जवाब के साथ मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा 8 के तहत विवाद को मध्यस्थ के पास भेजने का आवेदन दिया था। निचली अदालत ने 19 फरवरी 2026 को यह आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया कि आवेदन के साथ मूल मध्यस्थता समझौता या प्रमाणित प्रति पेश नहीं की गई थी।
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जिला अदालत ने पाया कि 10 मार्च 2009 के लाइसेंस समझौते की प्रति पहले से रिकॉर्ड पर थी और उसमें मध्यस्थता संबंधी प्रावधान भी मौजूद था। प्रतिवादी ने समझौते के अस्तित्व या उसकी सामग्री से इन्कार नहीं किया था। ऐसे में केवल मूल समझौता या प्रमाणित प्रति आवेदन के साथ संलग्न न होने के आधार पर धारा 8 का आवेदन खारिज करना उचित नहीं था। इस स्थिति में जिला अदालत ने कंपनी की दायर अर्जी को उसके मूल नंबर पर बहाल करने के निर्देश दिए। साथ ही, निचली अदालत के समक्ष उचित आवेदन दाखिल करने का अवसर देने को कहा गया है।
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