1990 के दशक में बंद हुए मार्ग को खोलने की
अपील खारिज, ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार
- जिला न्यायालय से संगड़ाह क्षेत्र के ग्रामीणों की याचिका पर राहत नहीं, शिकायत का भी कोई रिकॉर्ड नहीं
- कोर्ट ने कहा : रिकॉर्ड में मार्ग का उल्लेख होना पर्याप्त नहीं, उसके अवरुद्ध होने का ठोस प्रमाण भी आवश्यक
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। 1990 के दशक में सड़क निर्माण के कारण बंद हुए रास्ते (शामना-गोयला मार्ग) को लेकर जिला न्यायालय से ग्रामीण वासियों के हाथ निराशा लगी है। अदालत ने तहसील संगड़ाह के ग्रामीणों की ओर से दायर सिविल अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वादियों (अपीलकर्ताओं) की ओर से लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके चलते ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
जिला न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत में दायर इस अपील में ग्रामीणों ने मांग की थी कि सरकार को आदेश दिया जाए कि मौजा डूंगी में स्थित वर्षों पुराने शामना-गोयला रास्ते को बहाल किया जाए। उनका आरोप था कि संगड़ाह-लाना-पल्लर-बोगधार सड़क निर्माण के दौरान मलबा डालकर रास्ता नष्ट हो गया। हालांकि, अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि वादी यह साबित नहीं कर पाए कि वास्तव में सड़क निर्माण के दौरान मलबा डालकर रास्ते को अवरुद्ध किया गया था।
फैसले में यह भी कहा गया कि वादियों ने न तो कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किया और न ही किसी स्वतंत्र गवाह को पेश किया, जिससे उनके आरोपों की पुष्टि हो सके। यहां तक कि रास्ता बंद होने के संबंध में किसी सक्षम प्राधिकारी को समय पर शिकायत करने का भी कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।
वहीं, प्रतिवादी पक्ष (सरकार) ने दलील दी कि प्रस्तावित लिंक रोड का निर्माण ग्रामीणों की आपत्तियों के कारण संभव नहीं हो पाया, क्योंकि इससे क्षेत्र में स्थित कूहल (सिंचाई नहर) को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। अदालत ने इस पक्ष को भी रिकॉर्ड के आधार पर उचित माना। अदालत ने आदेश में कहा कि केवल राजस्व रिकॉर्ड में रास्ते का उल्लेख होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके अवरुद्ध होने का ठोस प्रमाण भी आवश्यक है, जो इस मामले में प्रस्तुत नहीं किया गया। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट (सिविल जज) के 24 दिसंबर 2024 के फैसले को बरकरार रखा।
संवाद