फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sirmour News: अदालत

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कोर्ट
विज्ञापन

ने राजस्व विभाग के पास जाने के दिए आदेश
- अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने फैसले में कहा अपीलकर्ता भारतीय परिसीमा अधिनियम का लाभ उठाने का होगा हकदार
- साल 2025 को सहायक कलेक्टर ने बेदखली करने के दिए थे आदेश
- तहसील राजगढ़ में 12 बीघा सरकारी भूमि का मामला
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के एक महत्वपूर्ण मामले में अतिरिक्त जिला न्यायालय ने अपीलकर्ता को राजस्व विभाग के पास जाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह राजस्व से संबंधित है और इसमें स्वामित्व (टाइटल) का कोई विवाद नहीं बनता। हालांकि, अदालत ने अपीलकर्ता को हिमाचल प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम, 1954 की धारा 14 के प्रावधानों के अनुसार उचित प्राधिकारी के समक्ष अपील करने की सलाह दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता परिसीमा अवधि की गणना में भारतीय परिसीमा अधिनियम की धारा 14 का लाभ उठाने का हकदार होगा।
यह मामला रमेश कुमार बनाम राज्य सरकार के बीच का है। तहसील राजगढ़ के रमेश कुमार पर करीब 12 बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप था। इस पर सहायक कलेक्टर, राजगढ़ ने 27 जून 2025 को उसे बेदखल करने के आदेश दिए थे और 4,03,704 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। राज्य सरकार ने भूमि राजस्व अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए पाया कि संबंधित व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए है। जांच में यह भी सामने आया कि जमीन 1976 में ही राज्य सरकार के नाम दर्ज हो चुकी थी। इसके बावजूद अपीलकर्ता ने अदालत में दावा किया कि जमीन उसके पूर्वजों की है और लंबे समय से कब्जे में होने के आधार पर उसे मालिकाना हक मिलना चाहिए। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि मामला स्वामित्व से जुड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गौरव महाजन ने रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि जमीन राज्य सरकार के नाम दर्ज है। कब्जा अवैध है और स्वामित्व को लेकर कोई वैध विवाद नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में अपील गलत दायर की गई है और इसे राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी के पास ले जाना चाहिए था। फैसले में अदालत ने अपील को खारिज करते हुए पूर्व में लगाया गया जुर्माना बरकरार रखा और अपीलकर्ता को उचित प्राधिकारी के पास जाने की सलाह दी। हालांकि, अपीलकर्ता को राहत देते हुए कहा कि नई अपील दायर करने के लिए समय सीमा में छूट दी जाएगी।
संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें