चेक बाउंस मामले में 1 साल की सजा
बरकरार, आरोपी की अपील खारिज
- अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 15 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही
- साल 2016 को दोषी ने भूमि विकास के लिए बैंक से लिया था 3 लाख का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश न्यायालय ने दोषी करार आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। यह मामला नवंबर 2016, को राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक से जुड़ा है।
नाहन निवासी नियाज मोहम्मद ने बैंक से भूमि विकास के लिए तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण अदायगी में चूक होने पर आरोपी ने बैंक को 2,30,462 का चेक जारी किया, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। 15 जून 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को एनआई एक्ट की धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 1 वर्ष का कारावास, 3 लाख का मुआवजा और भुगतान न करने पर अतिरिक्त 2 माह कारावास की सजा सुनाई थी।
अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि उसने ऋण नहीं लिया और चेक पर हस्ताक्षर उसके नहीं हैं। अदालत ने रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, हलफनामे और खाते से जुड़े साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए पाया कि हस्ताक्षरित चेक बैंक के पास होना ही देनदारी के निर्वहन के लिए जारी होने की विधिक धारणा है। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने अपील खारिज करते हुए दोषसिद्धि और सजा के आदेश को यथावत रखा।
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