अखरोट के पेड़ को लेकर भूमि विवाद मामले में
दंपती और बेटा-बेटी एससी/एसटी आरोप से बरी
-साल 2020 को राजगढ़ थाना का मामला, भूमि विवाद के चलते मारपीट और जातिसूचक शब्द के लगे थे आरोप
- भूमि सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार विवादित अखरोट का पेड़ सरकारी भूमि पर निकला
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। अखरोट के पेड़ को लेकर चले आ रहे भूमि विवाद के मामले में दर्ज एससी/एसटी एक्ट के आरोपों से दंपती (खजान सिंह और पत्नी उमा देवी) और उनके बेटा-बेटी को कोर्ट ने बरी कर दिया है। इन सभी पर पांच साले पहले भूमि विवाद के चलते मारपीट और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाया गया था।
विवादित अखरोट का पेड़ किसकी जमीन पर है, इसे लेकर मामला अदालत तक पहुंचा। कोर्ट में भूमि सीमांकन रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि अखरोट का पेड़ सरकारी भूमि पर स्थित है। नतीजतन, विशेष न्यायाधीश योगेश जसवाल ने सबूतों के अभाव और परस्पर बयानों के कारण दंपती और उनके बेटा-बेटी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
यह मामला 18 अगस्त 2020 को राजगढ़ थाना क्षेत्र में पंजीकृत है। अभियोजन के अनुसार भूमि विवाद के चलते आरोपियों ने शिकायतकर्ता राज और उसके परिजनों को रास्ता रोककर मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। साथ ही खजान सिंह ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर उनकी भूमि से अखरोट का पेड़ काट दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप और बयान आपस में मेल नहीं खाते। इसके अलावा घटना के कथित प्रत्यक्षदर्शी सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं। किसी स्वतंत्र गवाह का समर्थन अभियोजन को नहीं मिला।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मेडिकल साक्ष्य शिकायतकर्ता के कथन की पुष्टि नहीं करते और भूमि सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार विवादित अखरोट का पेड़ सरकारी भूमि पर पाया गया। साथ ही, कथित घटना के सार्वजनिक स्थान पर घटित होने के पर्याप्त प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने चारों आरोपियों को आईपीसी की धाराओं 341, 323, 34 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(s) के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
संवाद