चेक बाउंस दोषी की 1 साल की
सजा बरकरार, अपील खारिज
सत्र न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही
साल 2020 में ज्योति कोऑपरेटिव सोसायटी का मामला, दोषी ने लिया था 3 लाख का घरेलू ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
चेक बाउंस के एक मामले में सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषी को सजा भुगतने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार होने की स्थिति में देनदारी की कानूनी धारणा स्वतः बनती है, जिसे आरोपी साक्ष्यों से खंडित करने में असफल रहा।
सत्र न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने नाहन निवासी उपमन्यु चौहान के दायर आपराधिक अपील को निरस्त कर दिया। इससे पहले, 31 जुलाई 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोषी को एनआई एक्ट मामले में दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास और 3 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माने की राशि शिकायतकर्ता ज्योति कोऑपरेटिव नॉन एग्रीकल्चर थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सोसायटी को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश थे। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2020 में सोसायटी से तीन लाख रुपये का घरेलू ऋण लिया था। ऋण अदायगी में चूक होने पर आरोपी ने 18 जुलाई 2023 को 1,84,414 रुपये का चेक जारी किया जो बैंक में प्रस्तुत करने पर पर्याप्त धनराशि न होने के कारण अनादरित हो गया। नियमानुसार नोटिस दिए जाने के बावजूद भुगतान न होने पर मामला न्यायालय पहुंचा। अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि चेक खाली हस्ताक्षरित था और देनदारी पहले ही चुकाई जा चुकी थी, लेकिन न्यायालय ने इसे अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल मौखिक दलीलें पर्याप्त नहीं हैं और आरोपी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।