जांच में लापरवाही के आरोप पर अदालत
सख्त, पुलिस थाने से तलब की स्टेटस रिपोर्ट
- पीड़िता ने छेड़छाड़ मामले की निष्पक्ष जांच पर उठाए सवाल, न्यायालयीन निगरानी में मामले की उचित जांच की मांग
- पांवटा साहिब थाना का मामला, कोर्ट ने एसएचओ से 23 फरवरी तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। पुलिस थाने में छेड़छाड़ के विचाराधीन एक मामले में जांच प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास गुप्ता की अदालत में दायर प्रार्थना पत्र में पीड़िता (आवेदक) ने आरोप लगाया कि संबंधित एफआईआर की जांच निष्पक्ष व प्रभावी ढंग से नहीं की जा रही है तथा मामले की जांच की न्यायालय की ओर से निगरानी कराई जाए।
गगनदीप बनाम राज्य मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने केस रिकॉर्ड का अवलोकन किया। प्रारंभिक जांच में अदालत को यह आवश्यक प्रतीत हुआ कि जांच की वास्तविक प्रगति, अब तक की कार्रवाई तथा साक्ष्यों के संकलन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस विभाग से आधिकारिक रिपोर्ट तलब की जाए। इस पर अदालत ने थाना प्रभारी, पुलिस थाना पांवटा साहिब को निर्देश जारी करते हुए संबंधित प्रकरण की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट 23 फरवरी 2026 तक न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
अदालत ने आदेश में कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि जांच विधि अनुसार, निष्पक्षता के साथ और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है या नहीं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मामले में आगे की कार्यवाही और आवेदक की ओर से उठाए गए बिंदुओं पर विचार किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस मामले में आईपीसी की धारा 354 (किसी महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला करने) के तहत मामले की जांच कर रही है।
ई-मेल के जरिए कोर्ट में की थी शिकायत
अदालत में सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड में आवेदक की ओर से 6 जनवरी 2026 को भेजा गया एक ई-मेल भी संज्ञान में आया। उक्त ई-मेल में आवेदक ने किसी अन्य लंबित आवेदन से संबंधित कार्यालय आपत्तियों (ऑफिस ऑब्जेक्शन्स) पर प्रस्तुतियां दी थीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि वह विषय किसी अन्य आवेदन से संबंधित है, इसलिए उस पर निर्णय संबंधित आवेदन की निर्धारित तिथि पर ही लिया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई पुलिस की ओर से प्रस्तुत की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी, जिस पर आगे की न्यायिक कार्रवाई निर्भर करेगी।
संवाद