गोदाम निर्माण के लिए ऋण को न चुकाने पर दोषी की सजा बरकरार
4 दिसंबर 2024 को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को एक साल सजा सुनाई थी
इसके साथ 3 लाख मुआवजा देने का भी दिया था आदेश
अब अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने भी फैसले के खिलाफ अपील की खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन ने चेक बाउंस के मामले में दोषी के कैद की सजा को बरकरार रखते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। 4 दिसंबर 2024 को न्यायिक दंडाधिकारी (ट्रायल कोर्ट) राजगढ़, ने तहसील नोहरा निवासी हरदेव सिंह को एक साल की कैद और 3 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोषी ने अतिरिक्त सत्र अदालत में अपील दायर की थी। इसे खारिज कर दिया है। दोषी ने गोदाम के निर्माण के लिए बैंक से 2.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसे चुकाने में वह असमर्थ हो गया।
यह मामला 6 सितंबर 2018 को राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, राजगढ़ शाखा का है। शिकायतकर्ता बैंक के मुताबिक आरोपी ने ग्रामीण गोदाम के निर्माण के उद्देश्य से 2,50,000 रुपये के ऋण के लिए संपर्क किया था। उसने आश्वासन दिया था कि उक्त राशि को किस्तों में नियमित रूप से भुगतान करेगा, लेकिन जुलाई, 2021 तक 1,61,309 रुपये बकाया हो गया। इसी दौरान ऋण को चुकाने के लिए आरोपी ने एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक बाउंस हो गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा। भुगतान न होने पर न्यायालय में मामला दायर किया गया। इस दौरान ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को सजा और जुर्माने की सजा सुनाई थी। साथ ही, मुआवजा अदा न करने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया था। अब सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के दोष सिद्धि के फैसले और सजा के आदेश को बरकरार रखा है।
संवाद