नाहन (सिरमौर)। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर धीमी पड़ गई है। पॉजिटिव मामले कम हो रहे हैं और ठीक होने वालों का आंकड़ा बढ़ रहा है लेकिन संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा अभी से तैयारियों में जुटा हुआ है। विशेषज्ञों ने तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक बताई है। लिहाजा, इसकी व्यवस्था पहले से की जा रही है।
नाहन मेडिकल कॉलेज में इसके मद्देनजर 30 बिस्तर का चिल्ड्रन कोविड वार्ड बनाया जाएगा। इसकी तैयारियां की जा रही हैं। पूरा वार्ड ऑक्सीजन और वेंटिलेटर जैसी तमाम सुविधाओं से लैस होगा।
विशेषज्ञों ने अक्तूबर के बाद कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका जाहिर की है। हालांकि, यह जरूरी भी नहीं है कि तीसरी लहर आएगी ही लेकिन फिर भी पहले से तमाम इंतजाम करना जरूरी है। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज में 30 बिस्तरों का स्पेशल वार्ड बनाया जा रहा है। हाल ही में मुख्य सचिव के साथ इस संदर्भ में कॉलेज प्रबंधन की वर्चुअल बैठक हुई है जिसमें तमाम इंतजामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वार्ड से सभी बिस्तर ऑक्सीजन पाइप लाइन से जोड़े जाएंगे। इसका कार्य भी बाकायदा आरंभ किया गया है। वेंटिलेटर की भी व्यवस्था की जाएगी। कॉलेज मेें उपलब्ध वेंटिलेटर इसके लिए पर्याप्त हैं। हालांकि दो साल से छोटे बच्चों के लिए अलग से वेंटिलेटर खरीदने का भी कॉलेज प्रबंधन ने प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा अन्य तमाम उपकरण जो शिशु वार्ड में चाहिए वे उपलब्ध करवाए जाएंगे। कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल कौशिक ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में 30 बिस्तर का शिशु वार्ड अलग से बनाया जाएगा। यह तमाम सुविधाओं से लैस किया जाएगा। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर एवं अन्य उपकरण जो जरूरी है, उनका इंतजाम किया जाएगा।
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ददाहू-पांवटा में भी बन सकते हैं वार्ड
जिले में मेडिकल कॉलेज, सिविल अस्पताल ददाहू और पांवटा साहिब में ही शिशु रोग विशेषज्ञ है। लिहाजा, ददाहू और पांवटा में भी जरूरत पड़ने पर अलग से शिशु वार्ड स्थापित किए जा सकते हैं। सीएमओ डॉ. केके पराशर ने बताया कि बच्चों के लिए वहीं पर वार्ड बनाए जा सकते हैं, जहां पर शिशु रोग विशेषज्ञ है। मेडिकल कॉलेज में वार्ड बन रहा है। जरूरत पड़ी तो ददाहू और पांवटा में भी बनाए जाएंगे।