संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। यह बजट पोषण के नाम पर धोखा है। बजट में 8 करोड़ बच्चों के लिए सक्षम आंगनबाड़ी पोषण 2.0 के लिए 23,100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। सरकार राशि में बढ़ोतरी बता रही है। जबकि यह राशि 8 करोड़ बच्चों और 2 करोड़ गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिए प्रति बच्चा महज लगभग 38 पैसे प्रतिदिन बैठती है।
प्रेस को जारी बयान में सीटू के जिला महासचिव आशीष कुमार ने कहाकि बढ़ती महंगाई के दौर में यह बढ़ोतरी पूरी तरह निरर्थक है। गंभीर तथ्य यह है कि पोषण लागत मापदंड 2017 के बाद से आज तक नहीं बढ़ाए गए, जबकि सरकार हर साल दावे करती रही है।
उन्होंने कहा कि यह बजट देश की जनता, मजदूरों, किसानों, आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील सहित योजना कर्मियों की जरूरतों से पूरी तरह कटा हुआ, जनविरोधी और कॉरपोरेट-समर्थक बजट है। बेरोजगारी, महंगाई, भूख और सामाजिक सुरक्षा जैसे ज्वलंत सवालों पर बजट पूरी तरह मौन है, जबकि कॉरपोरेट मुनाफों, टैक्स छूट और निजीकरण को खुली छूट दी गई है।
उन्होंने कहा कि 53.5 लाख करोड़ के कुल बजट के बावजूद सामाजिक क्षेत्र में वास्तविक कटौती साफ दिखाई देती है। पहली बार व्यक्तिगत आयकर संग्रह 14.66 लाख करोड़, कॉरपोरेट टैक्स 12.31 लाख करोड़ से अधिक है, जो इस बजट के स्पष्ट वर्गीय चरित्र को उजागर करता है। इस बजट में जनता से वसूली और पूंजीपतियों को राहत दी गई है। देश में 26 लाख आंगनबाड़ी वर्कर्स-हेल्पर्स सहित लगभग 1 करोड़ योजना कर्मी हैं, लेकिन बजट में इनके वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा पर कोई ठोस प्रावधान नहीं है। यह बजट साफ तौर पर अरबपतियों के लिए तोहफा और मेहनतकश जनता के लिए सजा है। यह असमानता को और गहरा करता है और बुनियादी सेवाओं को कमजोर करता है।
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